~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

अंतर्द्वंद!!!!@

मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम श्री जनार्दनः कृष्ण
दोनो मेरे आराध्य
लेकिन आदर्श किसे बनाऊ
एक तरफ जालिम दुनिया है

श्रीराम को अपनाऊं तो ये बेरहम दुनिया अग्नि परीक्षा करायेगी
वनवास भेजेगी
खुद सामर्थ्यवान होने पर भी दूसरों की मदद लेनी पड़ेगी
निर्दोष महाबली बाली को छुप के मारना पड़ेगा
महासती अनसूया उद्धार हेतु बरसो इंतज़ार करना पड़ेगा
खुद के सामने अनुज लक्ष्मण को मूर्छित होते देखना पड़ेगा
यानी श्रीराम के आदर्श को अपनाने क्या -क्या सहना पड़ेगा ..यानी नंगे पांव अग्नि पर चलना पड़ेगा
तो फिर श्रीकृष्ण को अपनाऊं….
जिनकी संहिता में सब जायज है…
साम -दाम- दंड- भेद …..
लेकिन उसमें महावीर-महायोद्धा बबरीक को निर्दोष बलि के लिए उकसाना पड़ेगा
महाबली गदाधर जालन्धर को भीम के पक्ष में इशारा कर मरवाना पड़ेगा…
सखा अर्जुन के लिए वचन तोड़ शूरवीर भीष्म के लिए अस्त्र उठाना पड़ेगा
ओर भी त
हथकंडे अपनाने पड़ेंगे धर्म-नीति के लिए…
निष्कर्ष यही की
उधेड़बुन में हूँ
पशोपेश में
धर्मसंकट में हूँ
विडम्बना का ये चरम हैं..
तो फिर किसे अपनाऊं
दोनो को या सिर्फ एक को
लेकिन मैं श्रीराम को अपनाता हूँ..
क्योकि मैंने आज तक उन्ही की महाप्रकुति को अपनाया है
सौम्य ,सज्जन मर्यादित श्रीराम ने अपने गुरु के कहने पर पिशाचों के नाश के लिए शर चलवाये एक शिष्य के बतौर
उन्होंने महापराक्रमी धनुर्धर अर्जुन की तरह प्रश्न नहीं किये…
ओर उस समय उस महापराक्रमी विष्णु अवतार श्रीराम ने अपना आपा खोया जब बार-बार विनती करने पर भी समुद्र शांत नहीं हुवा…
तब
विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीती
तब बोले राम सकोप तब भय बिन होई न प्रीति..
आखिर श्रीराम एक मानव रूप में अवतरित थे..
दुनिया को आदर्श धरने मर्यादित-अनुशाषित रहे…
स्वयं महापराक्रमी होते हुवे भी कभी बल का प्रयोग अनावश्यक नही किया जैसा कि अन्य नृपराजो ने किया..
नमस्तुभ्यं रमापति
रामाय मंगलम
सीताय मंगलम
कुँवन्तो विश्वम आर्यम
जय श्रीराम …!!!
● NK
सेवक “सनातन”