आईने बदले-बदले मोहब्बत के इस जमाने !

आज के दौरा ऐ मोहब्बत के आइने जुदा- जुदा है ।
छत पर तो वो होती है मैं भी होता हूं ।।
हाथ मोबाईल उसके -मीरे ओर टाइपिंग लगातार
वो कभी मुझे मैं कभी उसे देखता हूँ ।।।
कॉलोनी वाले समझते हैं हम एक दूजे के फ्रेंड हैं ।।।।
भरम ऐ अहसास वो जाने तो कैसे जमाने के नए चलन ।।।।।
कभी वो मुस्कराती मेरी तरफ ,मैं मुस्कराता उसकी तरफ ।।।।।।
पर लोग असलियत ये जाने के-2
की वो-2 अपने प्रेमी से बात करती है ओर मैं अपनी प्रेयसी से।।।।।।।
*nk सेवक “सनातन”