~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

ऑन लाइन कवि सम्मेलन …

On Line कवि सम्मेलन, खुद प्रस्तोता खुद ही श्रोता*
( न हींग न फिटकरी , जो भी कहे खरी- खरी )
एक ख़याल मेरे कविमन में कौंधा
दिवाली- होली,ईद, क्रिसमस
मोबाईल का महंगा जमाना
जिसने त्योहार में पकवान
मेवे- मिष्ठान, मिठाई-सेवइया
सब सस्ते कर दिये देखते-देखते
पहले किसी मित्र,शुभचिंतक के
हाँ त्योहार पे जाते थे घर
बुलाने का रिवाज औपचारिक
हाँ तब भी अभी अब भी
बामुश्किल एक दो पकवान
परोसे जाते थे प्लेट में
अब मोबाईल पर बधाई
मोबाइल में 56 पकवान
खाओ कितने खाने हैं
यानी सांप भी मर जाए
ओर लाठी भी न टूटे
वाह भई कमाल वाह
यानी एक भी रुपये का
हां रुपये का खर्च
मोबाइल अपनी सुविधा
जो खर्च जो खुद के लिए

बस यही कमाल- ऑन लाइन कवि सम्मेलन
दूर-दराज से कवि-कवयित्री तैयार
पेलने को उद्दत
उड़ेलने को अनवरत
प्रस्तुति को प्रबल
सब अपने ही हैं वहां
कोई श्रोता नहीं
कोई अल्पाहार नहीं
कोई माइक नहीं
अपना हाथ ही जगन्नाथ
न तालियों की गुहार
न धमकी दिल्लगी
न लिफाफे की पावन उजली रस्म
ना अहा वाह वाह
खुद प्रस्तोता खुद श्रोता
बस मुझे तुझे , तुजे मुझे
दाद देनी है
न स्वागत रस्म
न तिलक उपर्ण श्रीफल
न ट्रॉफी न सर्टिफिकेट
न चीफ -चिप गेस्ट
है तो बस नामित
प्रतीकात्मक
बस थोड़ा नेट खर्च
मोबाइल सब ऐप उपलब्ध
यानी नेटीजन के जमाने
वाह ऑनलाइन
कवि सम्मेलन
यदि ऐसा हमेशा हो
तो फिर कौन विश्वास कौन विश्वास
कौन कुँवर कौन राणा कौन अजात
कौन अम्बर कौन अनामिका
सब चेन बेचैन द्रोही-विद्रोही
दुबे चौबे नीरज फ़ाज़ली
तूफान पागल दीवाना सनातन
न अलबेला चक्रधर चक्रम
सब को सहज सुलभ मंच
ऑनलाइन में सबको
हाँ सबको दिया जा सकता है
गोल्ड, डायमंड एमेराल्ड पदक
सोने से लिखा-जड़ा प्रमाण-पत्र
बोलो ऑनलाइन कवि तन्त्रम
जय नव युक्ति मन्त्रम्म
*nk सेवक ”सनातन”

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