कोरोना के काले सांये !!
कोरोना रावण – यज़ीदी के साये
सारी योजनाएं धूमिल हो गयी हैं
ख्वाबो की ताबीर मटियामेट हो गई
जिंदगी जाने किस विकट मोड़ पे आ गयी है
सुधरेंगे हालात भविष्य के गर्त में है
हर व्यक्ति या कहे हर शख्स बस पशोपेश में है
जिन्होंने जी ली जिंदगी कुछ संतुष्ट कुछ अधीर हैं
जजिंदगियां दोषी-निर्दोष वो जाने लीलती जा रही हैं
मनुष्य बना पड़ा है चुनोती सर्वेश्वर के लिए
स्वर्गिक भौतिक सुखों से गुलज़ार है धरती पर
हर कोई दुनिया मे धर्म रखता है पर नाम का
भरपूर चिरौरी -मख्खन चुना चापलूसी
प्रार्थना पूजा अर्चना दुवा प्रेयर अरदास स्वार्थमयी धुरी है
धरती के आदमी को चाहिए भगवान ईश्वर प्रभु अल्ला
लेकिन जीते जी मर कर नहीं
क्योकि मरकर तो सब को स्वर्ग-जन्नत-हेवन मिलना हैं
लेकिन तय ये की हर आदमी को जिना है
वो भी अपनी क़ीमत अपने मूल्य अपने सपन
आदमी का धर्म ढकोसला स्वार्थपरक
धर्म है तो सिर्फ जानवरों का जो हैं अपढ़
कोरोनो-19 नेवल बरफ़ा रहा कहर क्रूर
दुनिया के हर दम्भी -धनी का नशा हो गया है चूर
लाशों के ढेर लग गए हैं सारे रस्मो रिवाज खो गए हैं
सिर्फ जान की ही तवज्जो है आदमी हर गहन सोच में है
दुनिया की आबादी तवारीख़ ऐ आज छः अरब
अब तलक आंकड़ा एक लाख पहुंचा बे सबब
संभले हम दुनिया सारी ओर फिर पा ले वो लय
लेकिन भौतिकता से इतर वो ही नैसर्गिक लिए
ओर सच्चे मन से नैतिक मूल्य अपना कर
ओर सभ्य कहते हैं तो दानवता-कपटता समूल मिटाकर
छः अरब है दुनिया मे लोग कोरोना ग्रास बनाएगा कितनो को
सम्पूर्ण दुनिया तो नष्ट नहीं होगी
हां आप हम देश कितने खुशकिस्मत है देखना है
फिर ईश्वर ने श्रेष्ठ जानवर बनाया है
जिसके आगे शेर-हाथी -कोबरा भी हुवा जब खिलौना है
पहले भी ऐसी भयावह रुग्णताये आयी छाई
लेकिन हम श्रेष्ठ जानवर ने बुद्धि प्रयास से पाटी हैं
ये गरल-विषम दौर भी पट जाएगा
कुछ सावधानियां जरूरी हैं
फिर देखे देर सवेर कोरोना नदारद जिन्दी की वो रफ्तार फिर आएगी
बस थोड़ा सब्र थोड़ा विवेक विश्वास
ओर सबसे ज्यादा आत्म शुद्धि जरूरी है।
*NK सेवक “सनातन”