~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

“गणतंत्र अपना मन में गुबार “

“गणतंत्र अपना मन में गुबार ”
*आज गणतंत्र दिवस है ,आज जज्बो में ज्वार है
आज व्यवहारों में उबाल है ,आज शहीदों को हो रहा सलाम है
महान नेताओं को हो रहा प्रणाम है
नाम-अनामो को भी किया जा रहा याद है
*वो देश के रणबाकुरे हम भी गौरव आज़ादी के रखवाले
देश भक्ति राष्ट्रीयता का परचम सदा उंचा रखने वाले
हर मन मुग्ध समानाधिकारो का रूतबा रखने वाले
हम सनातन संस्कृति के रखवाले कर्तव्यों में रमने वाले
मुख्य धारा में सब हों शामिल तब देश का उद्धार ही उद्धार है
*आज अलग उमंग है आज नया उत्साह है
आज राष्ट्र भक्ति अपने चरम देखो साज ही साज है
रहे यही पड़ाव यही उठाव हरदम “सनातन”की चाह है
संप्रभुता हमारी हमे यही सिखाता है
भारत अपना देश नही निज प्राण सा दुलारा है
*देश बड़ा लोग भारी इतनी ही समस्याए न्यारी
लेकिन पडोसी चीन की तरह क्यों न बनाये इसे शक्ति
विकास दर अफ़सोस बहुत धीमी इसमें रही पापी वोट नीति
मुद्रा स्फिति दुखद तुलनात्मक बड़ी कमझोर ही चली
आज़ादी के इतने सालो में -2 आज भी हम विकासशील
अफ़सोस क्यों नही हम विकसित है “सनातन”की दलील
*विकसित करने क्या हमने राष्ट्र धर्म निभाया है
सरकारे चुनना दो में कोई इक रही हमारी मजबूरी है
क्यों हमने -2 वोटिंग करने में कभी दिमाग लगाया है
क्या चुनी सरकारों ने -2 राज धर्म निभाया है
कोंधते हैं ये सवाल चुभते हैं ये टेडे बवाल
राजनितिक पार्टियाँ जो भी रही जब जब सत्तासीन
वही भावनाओं का उबाल और वादाफरोशी
सभी का बस रहता इक सा राग सभी हैं सत्तानशीं
सभी रंगा सियार इक ही ईट की के चट्टे -बट्टे
अफ़सोस वही लकीर की फकीरी
*भारत अपना चिन्तन मनन की रहा खान है
फिर भी अदूरदर्शी कम पढ़ चुने हम क्या मान है
जहा निर्दोष भी भुगते अकारण
कोरी थोथी योजनाओं के नाम पर
भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर
और अकार्गर थोपी कानून लड़ी
इसलिए हो गहन चिंतन
प्रजातंत्र के नाम न चुने योग्य सरकारे
इसलिए-2 देश का हर राज नेता सजग हो मंझा हुवा हो
हर कोई जज्बो का पूर्णता में हो धनि
और कार्यान्वयन विधान हो
नागरिक अंध भक्त न हो
सही को सही कहे गलत को गलत
और दिन को रात कहने का भास् हो।
nk सनातन 24जनवरी 2017

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