तुम मेरे सपनों की सौग़ात हो
” तुम मेरे सपनो की सौगात हो”
( एक प्रेयसी से उसके माशूक की दूरियां लेकिन कहाँ ! )
वो सोये है लूट कर नींदे मेरी इस कदर
लेकिन मैं जागती आंखों से देख सपन मगर
उन्हें खूब देखता हूं , देखता हूं खूब
इन बसे सुनैना को मधु भरे नैनो में डूब
आलिंगन में भर -भर कर मदहोश
मधुर
मधुबन में बन भ्रमर शहद लुटता प्रचुर
वो कहती हैं दिलबर सिमट-सिमट बाहों में भर
कमाल करते हो दिलबर मेरे हमसफ़र
जी भर के हार-दीदार करते हो
सपनो में बुला के प्यार करते हो
ओ मेरे मन के देवता -मसीहा
यू स्वर्ग सा मालामाल करते हो।
ये किस्सा अधूरा राधा-किशन की तरह
एक चन्द अरसे में तुम प्यार हज़ार साल का लुटा गए
दौलत से मालामाल हैं हम-तुम
अब जन्नत पाना तो सिर्फ
ओर सिर्फ औपचारिक बात है
अधूरे अफसानों की यही बिसात है
चाले मोहब्बत की सुहानी सौगात है।
*NK Sevak “सनातन”