~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

तुम मेरे सपनों की सौग़ात हो

” तुम मेरे सपनो की सौगात हो”
( एक प्रेयसी से उसके माशूक की दूरियां लेकिन कहाँ ! )

वो सोये है लूट कर नींदे मेरी इस कदर
लेकिन मैं जागती आंखों से देख सपन मगर
उन्हें खूब देखता हूं , देखता हूं खूब
इन बसे सुनैना को मधु भरे नैनो में डूब
आलिंगन में भर -भर कर मदहोश
मधुर
मधुबन में बन भ्रमर शहद लुटता प्रचुर
वो कहती हैं दिलबर सिमट-सिमट बाहों में भर
कमाल करते हो दिलबर मेरे हमसफ़र
जी भर के हार-दीदार करते हो
सपनो में बुला के प्यार करते हो
ओ मेरे मन के देवता -मसीहा
यू स्वर्ग सा मालामाल करते हो।
ये किस्सा अधूरा राधा-किशन की तरह
एक चन्द अरसे में तुम प्यार हज़ार साल का लुटा गए
दौलत से मालामाल हैं हम-तुम
अब जन्नत पाना तो सिर्फ
ओर सिर्फ औपचारिक बात है
अधूरे अफसानों की यही बिसात है
चाले मोहब्बत की सुहानी सौगात है।
*NK Sevak “सनातन”