~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

धुंधला साफ आइना

धुंधलाया साफ़ आइना
दोस्त रिश्तेदार सिर्फ सुख के लिए ही रखो क्योंकि कोई इनमे से कोई भी दुःख को पसंद नहीं करता…!!
Fir दुःख शारीरिक आपको ही झेलना है…और आर्थिक दुख विपदा है तो सब नहीं कोई इक मदद कर भी देगा या करवा देगा लेकिन वह कब तक ठहरेगा देते ही उसकी काउंटिंग इक माह छः माह ,साल,दो साल….और तब तक बदकिस्मती से आप न उबरे…!!! तो दोस्ती खटाई में …रिश्तेदारी खटाई में ….
अतः सनातन सोच में तीन तरह के दोस्त ,तीन तरह के रिश्तेदार~
*सुख के दोस्त/रिश्तेदार

  • दुख के दोस्त /रिश्तेदार
    ( इसका प्रतिशत 00.00001 है 😃 और कम हो तो बोलना दशमलव के बाद तीन चार शून्य और लगा दूं )
    *सुख~दुख के दोस्त रिश्तेदार
    (इनका प्रतिशत
    99.99 /01😃😃😃)
    नोट: अगर दुख में भी साथ देने वाले दोस्त और रिश्तेदारों का प्रतिशत किसी के लिए ज्यादा है तो वो बहुत खुशकिस्मत है!!!!
    स्मरण रहे कृष्ण सुदामा के पास नही गए दुख कम करने खुद सुदामा को जाना पड़ा और वहा भी खुद्दार जमीर के धनी श्रीकृष्ण से अपना दुख नही जता बता पाए…लेकिन वो महान कृष्ण थे की उनका दुःख भांप गए और प्रत्यक्ष नही (मित्र की साख और जमीर के लिए) पर अप्रत्यक्ष ढेरो मदद कर दी और मित्रता का मान रखा….और श्री कृष्ण के पास था भी ईतना की लाख सुदामाओ को भी करोड़ों देते तो भी उनके समुद्र में इक लोटा पानी निकलने के सम होता! )
    *Nk सनातन

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