“प्यार का पारिजात”
“प्यार की पारिजात ”
प्यार के रंग हैं और हिना के हाथ
होठ गुलाबी और बिंदिया है माथ
आँखे कारी कजरारी जुल्फ घनेरी छाव
गाल नुरानी चाल मस्तानी मन सुहानि रात
कमर लचीली चाल नशीली चलो तो मधुमास
देखता हु तो नज़र ठहर जाती रहता नही भास
तुलसी बना मै रत्नावली तुम हर आहट में
बस तुम्हारी आस प्रिये तुम्हीं मेरे चंद्रहास प्रिये
तन से मिलो तुम अब या तब सपनो में
हां तुम मिलती हो बन के ख़ास
इस जन्म में तुम उर्वशी मेरी मै देवेन्द्र राज
प्यार में इससे क्या उत्तम बताओ प्रिये
मेरे दिलबर मेरे हमराज मेरी दिले राज
मेरे शीत प्रिये मेरी सुमन प्रिये
मेरी बसंत प्रिये मेरी हेमंत प्रिये।
N K सनातन