~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

बिखरे मोती धागे की तलाश

बिखरे मोती धागे की तलाश

*सज़ा रिहाई पर सदा*
(बिल्किस बानो गैंग रैप व 11 परिजनों की हत्या मामला)
सज़ा में ही त्रुटि रही की न्यायसंगत फैसला नहीं हुवा
वरना 15 क्यों होते सज़ा के की रिहाई की गुहार और रिहाई होती
या फिर हो संशोधन उम्रकैद में की
कि ताउम्र यानी मौत तलक बामुशक्क्त बामुलाइजा सश्रम सख्त कैद हो !
*Nk सनातन
***व्यंग्यम***
इक नेता जी_
भई बरसात में राज नगर बस्ती में पुल टूट गया …
मिडिया वाले इल्जाम लगा रहे है की इस पुल में खराब मैटेरियल लगाया गया… ठेकेदार से मिली भगत थी… इसमें लाखो डकार गए..
भाई गलत और झूठा इल्जाम है..
क्योंकि इसमें हमारी और हमारी सरकार की भली मनसा थी… वो ये की पुल साल भर में टूटेगा तो हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे ….इससे कइयों को फायदा होगा…
लेकिन देखिए हमारी भावना पर शक किया जा रहा है ; विपक्ष हमे बदनाम कर रहा है ! लेकिन जनता खुश है…
बस यही कारण है की हम अस्थाई यानी शुद्ध हिंदी में टेंपरेरी पुल ,सड़क और दूसरे काम करवाते है ! क्योंकि स्थायित्व और मजबूत कामो से रोजगार के अवसर कम हो जाते है,रुक जाते है !
उपस्थित जनता हमारे मनोवेग ,मनोइच्छा, भल मनसाई की पुख्ता प्रमाण है !
बोलो _
हमारे वोटर्स.. जनता जनार्दन~
हर बार लॉयपॉप सरकार हर बार बापकी सरकार !!
*Nk सनातन

**मजहब**

मज़हब दिलो में ही रहे दिमाग में नहीं
क्योंकि मज़हब दिमाग में उतर के अधर्म का हामी हो शेतानी हो जाता है !
*Nk सनातन
शरीर मिथ्या है सत्यम सिर्फ मृत्यु है अतऐव सत्य को ढूंढना व्यर्थ है।
*Nk सनातन

बात जहां तक ईश्वर को प्राप्त करने का लक्ष्य वो भी आत्मकल्याण के लिए ,
स्वार्थ रूपेण कोई बड़ी बात नहीं ; मन को निर्मल बना परोपकारी बना प्राणी , प्रकृति कल्याण ही ईश्वर को अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करने समान है !

ईश्वर को मृत्यु पश्चात प्राप्त करना तय है लेकिन जीते जी जो औरों के लिए जी ते है वो परोक्ष रूप से ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं।

प्रकृति के भौतिक मिथ्यात्मक सत्य स्वीकार करने से जहनी तौर से आप खुद को ईश्वर के बहुत समिप बहुत नजदीक बहुत निकटम पाते हैं।
*NK सनातन
शरीर मिथ्या है सत्यम सिर्फ मृत्यु है अतऐव सत्य को ढूंढना व्यर्थ है।
*Nk सनातन

बात जहां तक ईश्वर को प्राप्त करने का लक्ष्य वो भी आत्मकल्याण के लिए ,
स्वार्थ रूपेण कोई बड़ी बात नहीं ; मन को निर्मल बना परोपकारी बना प्राणी , प्रकृति कल्याण ही ईश्वर को अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करने समान है !

ईश्वर को मृत्यु पश्चात प्राप्त करना तय है लेकिन जीते जी जो औरों के लिए जी ते है वो परोक्ष रूप से ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं।

प्रकृति के भौतिक मिथ्यात्मक सत्य स्वीकार करने से जहनी तौर से आप खुद को ईश्वर के बहुत समिप बहुत नजदीक बहुत निकटम पाते हैं।
*Nk सनातन

सत्य क्या है जो सामने है जो सामने नही है सत्य है लेकिन उनके लिए जो वहां प्रत्यक्ष है है हमारे लिए इक अवस्था इक भ्रम है।
*Nk सनातन

*NK सनातन
संसार में सिर्फ मृत्यु ही सत्य का आइना है और सब प्राणी उसी की तरह जाने अंजाने उसी की तरफ बढ़ते है अतः सांसारिक दिनचर्या जीवन के भौतिक प्राकृतिक कर्म ही मिथ्या लेकिन सत्य है
*Nk सनातन
जठराग्नि यानी पेट की आग जीवन का सबसे बड़ा एवम पुख्ता सबूत है इस कड़ी में मौत का भय दूसरा अहम सत्य
और शरीर के लिए वस्त्र ,मनुष्य के लिए मिथ्यात्म सत्य है जिसे हमने भौतिक रूप से आरोपित कर दिया है
* सत्य की अवधारणा *
प्राकृतिक सत्य यानी सार्वभौमिक तथ्य जो हमारे आंकलन में सत्य है और भौतिक आंकलन सत्य होकर असत्य है क्योंकि उनकी प्रकृति नाश या
ऋनात्मक है ! *Nk सनातन