मदन राग बासंती मधुमास !

**माँ शारदे का बसन्ती राग-श्रृंगार **
कामदेव कामरूप रति मदन के सुर
आया मदमस्त बसंत देखो गुल-बुलबुल के रूप
मदमाती कुहुकुहाती प्यारी कोयल सुर भूप
बलखाती इठलाती शोख हवा क्या मौसमी सुप
फूल मुस्कराते कलियां लहराती पतझड़ अब नवपल्लव
राधा संग कान्हा बसे हर तरफ रानी गोपी जय वल्लभ
ऋतुराज आये क्या खूब बहार लाये
गयी थर्राती शिशिर छाए मदन गीत मयूरा गाये
ऋतु बसन्त के झूले प्रेमी युगलों की गलबहियां
मस्ती के मेलो में क्या गजब सखी-संगियों की फुलवरिया
फाग बसंत पपिहा राग मल्हार वाह तानपुरा
तरन्नुम ऐसा छेड़ा है मदनराज ने लेकर मन-सुरा
विद्याधात्री माँ शारदा गीत बजे बजे तेरा वाद्य वीणा
सात सुर भी पीछे क्या दिलकश दिलशाद तेरी वीणा
*nk सेवक “सनातन”