~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

मृत्य बीमा ………!!!!????

मृत्यु बीमा*
मैं एक रोज बीमा ऑफिस गया
रिसेप्शन पर एक मोहतरमा ने पूछा
बड़े प्यार और अदब से
जी बोलिये मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ
अपुन भी ठीक मुम्बया भाषा मे बोले
बोले कोई मदद वदद नही मंगता
तू बता बीमे के लिए किससे मिलु
मेने उसकी मूल प्रकुति जानने के लिए-2 हाँ हाँ जानकर ही अभ्रद्र भाषा का इस्तेमाल किया था
वो बोली थोड़ा रूठते हुवे
यानी साबित कर दिया उसने
कि ऐक सूरत बाद -2 औरते शालीन नहीं रहती
आखिर वो भी औरते ही होती हैं
कोई देवी महोदया नहीं होती
मैं पहुँचा काउंटर नम्बर 5 पर
वहां एक खड़ूस बैठा था
खड़ूस का मतलब यहां चेहरे से अव्यवहारिक से है
बोला वो- क्या काम है ?
मैंने कहा-मृत्यु बीमा कराना है
वो ठनका ओर बोला शाणाई में
जनाब आप गलत जगह आये हैं
यहां जीवन बीमा होता है
मैने कहा कैसे साबित करो
उसने कहा आप कह रहे हैं
आप साबित करे
वो सुनने को थोड़ा मजे के मूड में आ गया
ये सोच के की सनकी दिखे है
ठाला बैठा था मोटी तनखा
फिर मोटी तनखा वाला कभी नही चाहता
की हा कोई काम कराने आये
चुपचाप मोबाईल में लगा रहे
ओर महीना पूरा हो जाय
हाँ कोई फ़ाइल निकालने ओर काम पर कोई अलग वजन रखा जाय
तो तो पठ्ठा पूरा इंटेरेस्ट लेगा
मैंने कहा- मानो मैंने 10 लाख का बीमा कराया
वो 15-20 साल तक
क्योकि इससे कम अवधि का आप करते नहीं हैं
जी आगे बोलों
फिर मैं 18 साल में लुढ़क गया या टे बोल गया
तो आप धन राशि किसे देँगे
जी आपके परिवार को
तो फिर पैसा मुझे कहा मिला
मरने पर मिलने वाले धन को
आप जीवन बीमा कहते हैं !
सारे देश को बुद्धू बना रखा हैं
जीवन बीमा जीवन बीमा
योग क्षेम व्हेम -2 करके
बुलाओ तुम्हारे मैनेजर को
नही नही वो थोडे आएंगे
वो बॉस हैं
अरे बॉस तो तुम्हारे है
मेरे थोड़े हैं मैं कस्टमर हु
ओर कस्टमर भगवान होता है
जानते हो न
हां हां भई
ऐ मिस्टर ये भाई वाई का रिश्ता मत जोड़
ओर चुपचाप बुला मनेजर को
तूम जानते हो-2
हमारे बिन तुम्हारी क्या बखत
ओर फिर तुम गवर्नमेंट सर्वेन्ट
ओर सरकार कौन बनाता हैं
हम ओर हम
तुम पब्लिकलि कुछ सरकार के खिलाफ बोल सकते हो
नही
ओर देश का pm जब प्रधान सेवक
तो तुमारी क्या औकात
तुम भी सेवक नही सवेंट
तभी वो गया चेम्बर में बॉस के पास
बॉस भागा भागा आया
समझा कि इतना एक आम नागरिक नहीं बोल सकता
कोई नेता वेता दिखे
बोला जी sir हुकुम कीजिए
भाई रामु एक लस्सी लाओ साब के लिए
सूट बूट में था तो रॉब पड़ा
फिर थोड़ी बहुत अंग्रेजी भी झाड़ी
मैने उनसे वही प्रश्न किया
वो बोला 20 साल आप जिएंगे तो बीमा पास हो जाएगा सर
ओर आपको ही मिलेगा जीते जी
मेने कहा तब -2
फिर इस बीमे का नाम बुढापा बीमा रखो
जीवन बीमा हरगिज नहीं
महोदय बुढ़ापे में पैसा ही सबसे बड़ा सहारा होता है
कैसे मैने पूछा
बोले वो की बीमारी शिमारी में काम आता है
तो मैंने बोला फिर इसे बीमारी शिमारी बीमा बोलो
जी मेडीक्लेम वही तो है
अच्छा मेडीक्लेम
तो फिर जीवन बीमा क्यो
आखिर मैनेजर बोला
मैनेजर निरुत्तर था बोला
जी sir आप सही कह रहे हैं
वाकई मृत्यु बीमा ही हम करते हैं
आप एक एप्पलीकेशन में ये दुखड़ा कम्पलेन्ट में लिख दो
हम हेड ऑफिस भेज देंगे
ओर जो भी उत्तर आएगा
आपको अवगत कर देँगे
अच्छा ये हुई न कुछ बात
लेकिन इंसमे बीमा शब्द को भी हटाना होगा
क्योकि एक “र “बचता है बीमा शब्द के बाद
ओर वो “र” लगते ही
बीमा पास हो जाता है
ओर बीमित बीमार हो फेल हो जाता है
अन्ततः मैनेजर कोई ऐसा बीमा करो
जो जीवन मे जीवन के रहते जीवन वाले को मिले
मारने के बाद वालो को नही
जीवन रक्षा के नाम यू खिलवाड़ न करो
बीमा हो हर दो साल जीवन का
बूढ़े बीमार खूसट का क्या बीमा
बुढापा वैसे भी बीमारी का ही नाम
उस उम्र में जीना भी कोई जीना
जो बूढ़े हो लिए है उनसे हाल चाल पूछ लो
ओर जो सेवा कर रहे हैं अपने बस बस उन्हें तो हमारे मरने का इंतज़ार है
ऐसी सेवा का ओर बीमे का भई क्या काम है।
*NK सेवक ” सनातन”