~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

Quill pen, inkwell and open manuscript pages

NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

ये दुनिया ….!!!!!!

**ये दुनिया **
ये दुनिया आज भी वैसी है जैसी कल थी पड़ोसो थी नरसौ थी…. क्यो क्योकि फ़िल्म नास्तिक अजित साब स्टाररर “देख तेरे संसार की हालत–महान प्रदीप साब की रचना” 1940 की फ़िल्म ओर महान गुरु दत्त का दुखड़ा प्यासा ओर रॉज कपूर साब की जागते रहो…. फिर फ़िल्म “रोटी कपड़ा मकान ओर “कलयुग की रामायण”और नहि बस ओर नहीं गम के प्याले ओर नही ओर कसमे वादे प्यार वफ़ा -उपकार फिल्म ओर मन्नाडे 1970 -80 के दशक में …. यानी ये चलचित्र समाज का काला आइना प्रकट करती हैं….
ओर फिर चले महान सतयुग काल उसमे रावण तो रावण लेकिन कैकेयी का चरित मानवीय गिरते मूल्यों का बड़ा उदाहरण…. ओर फिर द्वापर .. त्रेता कंस, हिरण्यकश्यप होलिका हुवे यानी संसार तब भी वैसा ही था.. कलयुग तो कलयुग है जब सत युग मे ही ऐसा कुछ घटित हुवा तो बेचारा कलजुग तो था ही मानव के नैतिक मूल्यों से तथाकथित घोषित काल…

  • धर्म होकर धार्मिक होने पर भी 99% व्यक्ति अधार्मिक है … सिद्धांत में धर्म लेकिन व्यवहार में अधर्म… मेरी इस टिपण्णी का मर्म यही की ये दुनिया ऐसी थी और ऐसी ही रहेगी और जब तक पेट है और मस्तिष्क है ये ऐसी ही रहेगी दुनिया मे उपस्थित किसी धर्म मे ये सामर्थ्य नहीं दिखता की मानव सौ फीसदी नैतिक मूल्य परस्त हो जाय.. वो होना भी चाहे तो ये पापी पेट और ये विषम दिमागी सोच ऐसा होने नहीँ देगी.. जहन या ह्रदय सबके पास लेकिन एक अंग के रूप में .. इसकी आवाज़ सुनने मरने से पूर्व मरना पड़ता है ओर अफसोस मरने से पहले कोई मरना नहीँ चाहता..!!!
    *nk सेवक “सनातन”

Back to the Treasure Index