◆ उड़ानों का प्रतिक मतवाला अपना मुक्ति दिवस ◆.
राष्ट भक्ति-रस मुक्ति गीत
मुक्ति-रथ विजय-दिवस
लो आज फिर आया अपना सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्योहार ।
हर गली मोहल्ला-घर, आफिस छाया राष्ट्र भक्ति का ज्वार । 1 ।
मनाने की उमंग , उमड़ी
उत्सव राष्ट्र-मंगल की तरंग ।
राष्ट्र की धड़कन बड़ी स्कूल, सज रहे देश-भक्ति के रंग ।2।
विद्यार्थी बड़े आतुर दिख रहे ।
करने को पीटी -परेड प्रदर्शन दमक रहे ।।
सांस्कृतिक प्यार आन-बान -शान – की झांकियां ।
इनमें विविधता में एकता की राखियां ।3।
सजी-संवरी विद्यार्थियों की टोलियां ।
नाच -गान, नाटक ,नारो की त्योरिया,
रोली वंदन,ऐकाभिनय
,जनप्रतिनिधि भाषण ओर क्या क्या विरल तैयारियां ।
आज पंद्रह अगस्त देश-जन स्वतंत्रता की यारिया ।4।
आजादी का मल्हार आजादी की बहार
आज हर देशजन बसंत
कोयल कुहुक ,गुल ओर बुलबुल ।5।
ये आजादी की सांसें
जिसमे दीवानो की आहे
लेकिन क्या थी पक्की धुन
दिया संगीत कितना प्यारा
ये लोक राज न्यारा है उनकी बून ।6।
लोक-राज के बड़े नेक इरादे
ऊंच नीच सब अभिशाप हैं पाटे
आज सब समता -क्षमता के राजे
तिरंगे ही तिरंगे फहराने को मस्ताने ।7।
राष्ट्र गान वो राष्ट्र गीत
जो उस फहर पर वारे
इसकी फहर में आजादी की गाथाएं
रहे हम एकमेव चलती रहे रीति अमिट
फलते रहे फूलते रहे हरदम रहे उज्ज्वल फूल- फलित ।8।
देश का गर्भ लाल किले की प्राचीर
जिसने देखे हैं कई दंश देश की खातिर
लेकिन निरन्तर अवार्चिन
लहराता अपना तिरंगा जो कहता बढे चलो दिन ब दिन।9।
लोकतंत्र का प्रहरी जब लोकनायक द्वारा फहराया जाता है
माहौल जोशीला ,मन मे गौरव उल्लास क्या खूब ठन जाता है
राष्ट्र गान की मधुर तान क्या राग अलापा जाता है
तब सीना गौरव से फुला नही समाता है। 10 ।
इस महादिन को देखा हमने
जब उन रणबाकुरों ने दी सांसे अपनी
आजादी के परवाने क्या धुन रमे ओर बलिवेदी चढ़े
देश ख़ातिर क्या तन और
जान लड़े वो महंगी
ओर हँसते-हँसते अपनी धड़कनो दे दी इस दिन की लेकर धुरी
वो क्रांति वीरों की टोली जो मरते दम तक रही अड़ी ।11।
लालकिले से भाषण देशजनो के सपने
मगर लोकतंत्र है थोड़ा ऊपर-नीचे चले तो चले
लेकिन मन को तसल्ली बड़ी की अपनी ,अपनी
जैसा भी है राज अपना तो अपना है
राजतंत्र से बेहतर प्रत्यक्ष- परोक्ष भागीदारी, खूब मन बहलता है
चलो पांच साल में एक वार ही सही
जन प्रतिनिधि वोट के लिए झुकता सेवक तो अपना है
जाहिर है ये तो सब प्रतिनिधि असल मे शासक हम ,लगता है
।12।
आखिर हम हैं इन्हें बनाते
इसलिए राज तो अपना है
चाहे गहनों सा सपना है
स्वतंत्रता का सिरमौर
अपना अगस्त 15 कहता है
मिला नहीं खैरात में जानो
लहू इसमे बेहिसाबो का है
यू ही मेल-झोल में रहना यदि
ये दिन चीर स्थाई रखना है
हां अक्षुण्ण अनंत रखना है ।13।
आजादी सा नही सुकूँ हर पंछी -पखेरू कहता है
वो देश-जन बड़भागी जो लोकतंत्र में जीता,
विचरण करता है !14!
प्रेरित : 15 अगस्त ,2021
हम सब भारतवासीयो के गौरवमयी ,उत्कंठ आकाशी दिवस पर ….*….
जय भारत, जय हिंद
*nk सनातन