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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

आज रुक जाओ यार ,कल चलेंगे!

*आज रुक जाओ यार कल चलेंगे!!!*

( देश के अत्यंत मशहूर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की तारीख 15 को अत्यंत गम्भीर तबियत पर)

यमराज जी आप पधारे हैं
स्वागत स्वागत हे आगत!
लेकिन बड़ी देर कर दी हैं
कब से ही इंतजार था आपका
लेकिन अब आये हैं!
वो भी गलत समय पर
आज मेरे देश का महापर्व
राष्ट्रीय आन-बान-शान का
हमारी आजादी का दिन !
सारा राष्ट्र हर्षा रहा है
मुदित गर्वित आन्दोलित
देखो मेरे देश का तिरंगा!
लहलहा रहा है लिए जिया!
इसलिए मित्र आज नही,
एक दिन में आपका क्या
हां क्या कुछ बिगड़ेगा!
कुछ नही दश साल यू ही रखा!
चलो एक दिन ओर सही!
यमराज जी-संसद में 50 वर्ष रहा!
पक्ष में भी विपक्ष में भी
सबसे बहस की मनाया!
वो विरोधी समझे समझाया
अब आप से ठनी है!
मेने तो पहले ही लिख दिया है
मौत से क्या डरना!!
मौत अब आये तब आये
ओर मौत की उम्र ही कितनी!!
महज चंद ओर वो भी!!
हां अनजान, अचानक ही!
आये और ये अंतिम सत्य
हां सबको रुलाये, तोड़े टुटाये!
नही तोड़ इसका !!!!!
शिकायत हज़ारो!!!!
लेकिन बेमन स्वीकारे
विवशता धरती की ये
हर प्राणी आये और जाए
सब कुछ तय यहां !
तकदीर बनाये बिगाड़े!!

यमराज जी-आज पावन दिन!
मेरे देश पर मरने वालों का दिन!
बडे संघर्षों पीड़ाओं यातनाओं
हां गुलामी के दिन गिन घिन!
यमराज देव मैने उनको भी मनाया!!
जिन्हें मनाना ना किसी के बस का न था!!
24 दलों को समझाया ओर
इतिहास रचाया!!
आप तो देव हैं आप वो (सांसद यानी फ़सादत) नही
आप तो मान जाएंगे!
हां विधि के विधान का नाता न देना
मैं जानता हूं कुछ मे्रे जैसे लोगो को
हां कुछ विधान परिवर्तित कर भी दो !!
हां बदल भी दे यमराज तो
तो क्या फर्क पड़ता है!!!
कह देना देवाधिदेव महादेव से
की आदमी अच्छा था !!!!
उसके देश मे रिपोर्ट कार्ड अच्छा था!!
वो तो तैयार था कब से ही !!
यानी ग्यारह वर्षो से!!!
ओर वो भी विषम व्याधि में@!@
हमसे ही भूल हुई की देर की
हां की गलत आदमी को
हां गलत आदमी को!!!!
ये गम्भीर बीमारी दे दी!
अच्छा और दिलो में खुशी भरने वाले
हां -कि आवाज़ ही बंद कर दी
आवाज ही जिसका गहना था!
जिसकी याददाश्त चुटकी से तेज थी!!
उसे पहचानने -सिर्फ ताकने भर हां निरीह निहारने तक सीमित कर दिया!
नही नही सर्वेश्वर नही!!
हमारे विभाग से भूल हो गयी!
अतएव जग श्रेष्ठ मैन उसकी दलील सुनी
ओर वाकई गलत दिन था !!
कल 15 अगस्त यानी उसके देश का
हां उसके मादरे वतन का
स्वतंत्रता दिवस ओर जश्ने वर्षगाँठ का दिन था!!
वो साक्षी होना चाहता था!
फिर सिर्फ एक दिन का ही सवाल था!!!!
सो आदमि अच्छा था!!!!!!
ओर देश का लाडला भी!
जिसने प्रसिद्धि का इतिहास रचा!
……बस बस बात अटल बिहारी की हो रही है-भोलेनाथ बोले
मैं अन्तर्यामी हूँ मुझे सब पता खबर है!!!!!
लेकिन ये भूल मैने ही करवाई है!!
जानकर वो इसलिए कि-
की 11 साल निस्तेज रखने पर भी!!!!
हां क्या वो जनता का प्यारा रहा है या नही!!!!!!
देखा तुमने जनता भूली नही उसके महा कृत्यों को!!!!!
क्या जन सैलाब ,क्या हुजूम महानायक के लिए!!!!!
जब कि प्रशासन ने हाथो हाथ दाह संस्कार रचाया!!!!
उन्हें उनकी 11 साल की हालत से ये अंदेशा था
की हां लोगो ने उस नायक को भुला दिया ह!!!!!!
टुकड़ी भर लोग आएंगे
लेकिन वाह लोग दूर दूर से उमड़ पड़े
ऐसे जैसे उनका नायक आज भी भूमिका में है
मैं जानता था वो तुमसे बहस करेगा
क्योकि उसे सबसे ऊपर मेरे सखा राम की तरह!!!
हां निज देश धर्म प्यारा था!!!
चलो नेक इंसान को उसका हक तुमने दिया!!!
क्यो की उसने अपने हुनर बल!!।अट्टहास उल्लास दलील से लिया!
चलो मै भी कह दु-
उसके देश के लोगो के प्यार के खातिर!
जो उसको उन्होंने दिया
ओर वो जिया सच्चा ओर बेदाग बिंदास जिया !
खासियत ओर तासीर उस शक्षियत की कि-
उसने ता जीवन दूध को दूध और पानी को पानी कहा!!!!!
सत्ता का मोह उसने कभी नही पाला
राजधर्म निभाया ओर लोकतंत्र क्या है समझाया!
वो अटल था टल गया जहान से
विधि के विधान से
लेकिन लेकिन सुकर्मो से अपने
सुकुमार बन अमर लोकतांत्रिक
भारत के इतिहास में!!!
*Nk सेवक “सनातन”

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