आसमां की नीचाईयां औऱ धरती की ऊंचाईयां
आसमान की नीचाईयां ओर धरती की ऊंचाईयां
बहस उससे की जाय जो समग्रता ओर सलीक़ा रखते हैं
ऐसे कितने मौलिक-अमौलिक विद्वान जो ये मान रखते हैं
जो गहन-सटीक ज्ञान- विज्ञान रखते हैं ?
और हम जो लिख रहे तुम क्या समझ रहे हो
अफ़सोस वो कैसा छिछला ज्ञान रखते हैं
छिछले पानी मे तैरे लोग खुद को बड़ा तैराक समझते हैं
जाने वो -हम ऐसे भरम का हिसाब रखते हैं
तर्क क्या है हम जाने कुतर्क तुम्हारे आईने
अरे नादानों खुद को पूरा जानें अभी कितने पानी मे हो तुम
अफ़सोस छिछले ज्ञान पर चलने वालों
तुम्हारा सफर लंबा नहीं कूप मण्डूक हो चरितार्थ करते तुम
अपने आप को बड़ा बहुत बड़ा समझने वालों
चलो छिछला ही सही दुनिया को मटियामेट करने को काफ़ी है
ऐ गाफिल तेरा ये ज्ञान नाकाफ़ी है
गिरेबान में झांकने की जरूरत है
आपका क्या कद है हमे ख़बर है
अभी उडे हो ऊँचाई नापने की जरूरत है
हमारा क्या है मशवरा देते हैं “सनातन”
माने तो मजेगा तू भला होगा तैरा
हमारा क्या
हमारा तो बहुत कुछ अच्छा कट रहा है।
‘सनातन” हैं बस सनातन लिखते हैं।
NK सेवक “सनातन “