उनके छिक पर भी तुरन्त एक्शन और उनके खून पर भी कोई संज्ञान नहीं!

उनके छिक पर भी तुरन्त एक्शन और उनके खून पर भी कोई संज्ञान नहीं!

मजलूमों पर कहर ढाए तो कुछ नहीं हुवा महकमें पर हुवे सितम तो साहब हरक़त में आये !
●● कइयों को मारा तो सालो साल कुछ नहीं हुवा …पुलिसकर्मियों को क्या मारा 4 दिनों में ही एनकाउंटर हो गया….!!!!●●
(कुख्यात गैंगस्टर सरगना विकास दुबे ,कानपुर, उत्तरप्रदेश के एनकाउंटर पर एक तकरीर )
एनकाउंटर डेट : 10 जुलाई ,2020
वो मारा गया पुलिसकर्मियों द्वारा
एक एनकाउंटर के तहत
क्योकि गाड़ी पलटी सड़क से सरक कर
दुबे रिवाल्वर छिनता है और भागने की कोशिश
सरेंडर के लिए कहा जाता है लेकिन वो नही मानता
अब वो गोली नहीँ चलाता जबकि रिवॉल्वर तानता है
ओर पुलिस उसके सीने में तीन गोलियां दागती है
ओर एक हाथ मे जैसा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है
लगातार गाड़ी ओर गाड़िया जिसमे दुबे को दबोचा था
भाग रही थी सड़क पर पल की मीडिया रिपोर्ट भी तीस पर
लेकिन सुबह-सुबह ये खबर चौकाने वाली
की कि विकास का नाश हो गया
कारण भागने की कोशिश
फिर प्रश्न की भागा क्यो नही
भागता तो गोली पीठ पर लगनी थी
लेकिन गोलियां तीन सीने के बीचों बीच
एक हाथ पर क्यो जब
क्योकि रिवॉल्वर जो उसने पुलिस से छीना
ऐसा कैसे हो सकता है कि इतना ख़तरनाक अपराधी
ओर पुलिसकर्मी इतना लापरवाह की दुबे रिवॉल्वर छीन ले
ओर माना उसने छीन रिवाल्वर तानी पुलिस की ओर
ओर पुलिस ने उसके हाथ पर गोली चलाई
अगर ऐसा है तो फिर तीन गोलियां ठीक सीने में कैसे
क्योकि
हाथ पर लगने से गोली संतुलन तो बिगड़ता है
ओर जब तीन प्रथम गोलियां सीने पर तो हाथ पर जरूरत ही नही
खेर बयान अब आने लगे हैं सरकारों के सरकार के प्रतिनिधियों के
मीडियाकर्मियों के
की ये हुवा वो हुवा
ये क्यो हुवा कैसे हुवा
ये कैसे हो सकता है
ये वहां क्यो हुवा
मीडिया को क्यों पहले ही रोक दिया
लेकिन चलो एक बदमाश का अंत हो गया
एक गुंडागिरी का अंत हो गया
ओर नाटकीयता ऐसी की खुद गिरफ्त ओर आत्मसमपर्ण
फिर मध्यप्रदेश पुलिस सौपति है उत्तरप्रदेश पुलिस को
ओर बस शहर के मुहाने ही हादसा हुवा
हादसा भयानक न था
यानी दुबे भाग सकता था
लेकिन उसने पुलिस कर्मी की रिवाल्वर छीनी
यानी दूसरे पुलिसकर्मी गम्भीर होंगे
फिर भागना ही था तो गोली तानने की जरूरत क्या थी
फिर दुबे कोई ऐसा तो न था कि
की बन्दूक ताने ओर गोली न दागे
फिर उसे भागना था तो आत्मसमर्पण का क्या तुक
अब बारह घण्टे पुलिस के साथ था
क्या राज उसने खोले
जिंदा रहता तो सबके सामने राज खुलते
लेकिन अब कुछ नही होगा
सब राज दुबे के साथ चले गए
इस दलील में मेरी बस यही दलील
की जब कोई साधारण व्यक्ति के साथ हो
तो तो पुलिस ऐसी कार्रवाई करे
न कि सिर्फ पुलिस के कर्मी मारे जाए और पुलिस हरकत में आ जाये
या फिर कोई रसूख या ओहदेदार या कोई राजनेता
आम जनता को भी ऐसी ही तरज़ीह दी जाय
*NK सेवक “सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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