लाइक्स एंड
डिसलाइक्स (पसंद-नापसंद likes-dislikes)
कहते हैं कि किसी को मुस्कराहट देने से कभी कुछ नहीं जाता ठीक वैसे ही FB पर किसी को लाइक (Like) देने से भी कभी कुछ नहीं जाता और फायदा ये की प्रतिपक्ष आपका मुरीद, आफ़रीन /अहसानमंद या कृतज्ञ हो जाता है ओर स्नेह-विह्नल हो दोस्ताना या मित्रवत हो आपका प्रसंशक हो जाता है…..लेकिन मैं जानता हूँ इसका किसी पर तनिक भी असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इक तो कई लोग FB पर बस यूं ही हैं या फिर सिर्फ प्राइवेट फ्रेंड्स लिस्ट वाले हैं और जो पब्लिक हैं उसमें 20 प्रतिशत स्थापित हैं और वो ये भ्रम में हैं कि बस हम ही हम हैं और बाकी सब फिसड्डी हैं… ओर ये अहम उनके प्रसंशक कम करता है…. पेड़ जब फलदार हो जाता है तो झुक जाता है और ये तथ्य वो नामचीन शख्स जानते हैं लेकिन व्यवहार में उनका उससे कोई लेना देना नहीं हाँ सिद्धांत में उनके आदर्श हारिश्चंदरी ओर राममय हैं…!!!!
जड़वत, सनकी न होकर संजीदा ओर उदार होना व्यक्ति का सबसे बड़ा आभूषण हो सकता और आपकी यही सरलता आपको आगे बढ़ाती ओर लोग आपके अनायास ही फैंस बनते जाते हैं…!
यहां फ़िल्म दस लाख ओर् अपनापन के गीतों की कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं, यथा—
पैसे दो पेसो से कुछ न घटेगा दौलत वालो
ले लो दुवाये निर्धन की धन और बढ़ेगा दौलत वालो
गरीबो की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा
तुम एक पैसा दोगे वो दस लाख देगा…!!!!
निचोड़ यही की देने से ज्ञान-प्रशंसा दौलत बढ़ती है, ख्याति बढ़ती है!!!
*nk सनातन