कुछ दर्शन के तीर!

कुछ दर्शन के तीर!

कुछ दर्शन के तीर
उसकी ओर उसकी मोहब्बत में फर्क बस इतना था ..
की उसके जनाजे के पीछे थे तो हज़ारो लेकिन ओपचारिक मगरमच्छ के आँसु लिए
ओर उसके पीछे थे तो कुल जमा सौ लेकिन दिल के आंसू रोते हुवे।
Nk सनातन
उसके बाप के जनाजे में हज़ारो जमा थे
क्यो ..क्यो की एक बेटा बड़ा राजनेता था
दूसरा बड़े ओहदे पे !
*Nk सनातन
उसके बाप के उठावने में कई छुटभैये नेता हज़ारो कार्यकर्ता साथ लेकर आये थे …
क्यो….
सिर्फ़ उठने के लिए
क्योकि अगले साल चुनाव थे और टिकिट आवंटन उठने वाले के बेटे के हाथ मे था ..
ओर उठने के लिए सहानुभुति का स्वांग/ दिखावा जरूरी था..
राजनीतिक का यही उसूल था, है ,रहेगा
क्योकि उठाणवने वाली शख्स के बेटे भी
किसी बड़े राजनेता के बाप की लाश को उठा कर दूर तक कंधा दे बहुत ऊपर उठ गए थे और आज कइयों को ऊपर उठाने की कौवत रखते हैं !
*NK सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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