~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

कृतिम मातृत्व !!!????

सरोगेसी ओर मातृत्व
मातृत्व सुख हर मां की चाह एक स्वर्गिक सम सुख
हर कोई मां इस सुख हेतु भोगे विषम दुख
लेकिन ये क्या जमाना बदल गया है माँ भी बाज़ारू
सरोगेसी का नव- अद्धतन रसिकों रसूखों का चलन
एक माँ जन्म दे अपने कोख से गुजर पीड़ – प्रसव
ओर अफसोस मां नहीं कहलाये घोर कलयुग
बड़े बड़े ने ये नव शौख पाला है
हैं पहले से दो क्या तीसरा जरूरी है
हम दो हमारे दो परिवार नियोजन को धत्ता बताया है
बॉलीवुड का बादशाह खान इस शोख़ से रोपित
क्या है देश के नाम आह्ववान ऐ कर्तव्य दोषी
क्या ये मानवता के प्रति अपराध या भलमनसाई
दूसरे की औलाद के लिए प्रसव झेले एक औरत ठीक है भाई
लेकिन असल माता तो सक्षम क्यो कष्ट दूसरी पर आरोहित
इसलिए सिर्फ इसलिए कि वो है धनिक बिरादरी
गर ऐसा है तो लानत है उन दोनों सेलेब्रिटीज़ को
जो खरीदते सबल-सबला हैं कोख दूसरी अबला की
हाँ दैहिक रूपेण हो नारी कोई असक्षम
तो वाजिब लाजमी कहे धर्म “सनातन”
अब डीएनए तो नन्हे -नन्ही में उन दोनो के
लड़कीं सर्वविदित वो बालक पला कोख में दूजी के
अब बच्चा उसका ऋणी या उसका
न यहां कोई देवकी रानी न यशोदा मैया
बात आखरी पते की ले वैदिक धर्म की बलिवेदी पर
क्या उस किराए की माँ का शील अशील
जिसके गर्भ में गए किसी पर पुरुष के स्पर्म
क्या कोई मजबूर पति स्वीकारेगा उस महा कृत्य चरित्र
अगर तौले नारी शील उस पुरातन सत्य
क्या वो जन्मा शिशु कभी उसको माता कह पायेगा
कभी वो जान पायेगा उस मां की पीड़ा की
क्या जान वो धिक्कारेगा अपनी सैद्धान्तिक माता तो
वो सैद्धान्तिक सिर्फ माता जननी कतई नही
क्योकि उसने उस शिशु की कभी जना ही नही।
*nk सेवक “सनातन “