Nk सनातन की जानिब से खिराजे अक़ीक़त*
( ख्यात शायर Dr राहत इन्दोरी साहब के निधन पर जिन्हें पिछले साल मोती मगरी में लाइव प्रत्यक्ष सुना था )
मोहब्बत हो या के अम्न
मसला वतनपरस्ती को या
जज्ब ऐ क़ौमी ख़ुलूस
राहत की तक़रीर से सुकू मिलता था
दिलकश पुरजोर अंदाज ऐ जुदा आदायगी
राहत की शायरी से दिली राहत का अपना मका होता था
जीते जी जन्नत दिया लाखो दिलो को
अचानक जन्नतनशीं हुवे तुम
दिलो को तोड़ गये तुम
ख़ुद राहत पा गए दुनिया ऐ फ़ानी से उठ
सुखनवर दिलो को बेचैन कर
*दिलकश बेख़ौफ़ शायर
राहत इंदौरी साब को अक़ीक़त के फूल
*nk सेवक “सनातन”