क्षणिकाएं अपने रंग की!

क्षणिकाएं अपने रंग की!

[08/01, 18:41] N K Sevak: बुलन्द हैं तकदीरे जिसकी योग्यता या अच्छी लकीरों से
सावधान …सनद रहे सूरज को भी ग्रहण वक्त बेवक्त ओझल नजरों से
*Nk सनातन
[08/01, 18:41] N K Sevak: दुकानें तमाम मेरे हिस्से की बिक गई है ऐ जमाने वालो
अब मैं बिल्कुल फुर्सत (ठाला) में हूं ऐ जमाने अब तुझे मुझसे कोई शिकवा शिकायत नहीं होगी!
*Nk सनातन
[08/01, 18:57] N K Sevak: कवि सम्मेलन हो कोई भी तीन~चार सुनी सुनाई रचनाओं पर परजीवी लटीफो पर जिंदा है
वहा जिंदा लाशे मुर्दों में जान फूंकती है
तो नही मशहूरता ही
का पेबंद लिए बजाओ ताली कह मजबूर करती है
कविताओं के उद्देश्य भटक गए हैं संजीदा दर्शन पर वाह नही मिलती
ओछे फूहड़ लतीफो तकरीरो पे खूब तालियां बजती है !
*NK सनातन
[08/01, 19:03] N K Sevak: कवि सम्मेलन दर्शक दीर्घा में यदि अधिकाधिक श्रोता 60 के पार हैं तो ज्यादा उम्मीद न करें
क्योंकि आप जो कह रहे है उम्रो के विविध पड़ावों से वो उनसे भलीभाती वाकिफ़ जो है
लेकिन यदि युवा वर्ग है तो आप खुशकिस्मत उन्हे जो भी सुनाओ नया ही नया खूब वाह मिलती है
*Nk सनातन
[08/01, 19:47] N K Sevak: सोशल मीडिया को शास्त्रीयता में विश्वास करने वालो ने अराजक कह दिया
लेकिन वो ये देखे की अभिव्यक्ति और रचन कैसा भी हो आम ओ खास कर दिया !!
*Nk सनातन
[08/01, 19:50] N K Sevak: काव्य मंजरियां या के गोष्ठियां आम ओ खास होती हैं
क्योंकि नवीनतम रचनाओं का आकाश सहज मंच भावो की जान होती हैं !!
*Nk सनातन
[08/01, 19:54] N K Sevak: भाव तो भाव हैं मन मंदिर का आसमा हैं
इसलिए अव्यक्त भाव कुछ जज्बात के लिए अल्फाज नही मिलता है !
*Nk सनातन
[08/01, 21:28] N K Sevak: दो रूहों की आग जले इक बार तो फिर किसी जनम में कभी न बुझे
और बुझ जाए “सनातन” तो समझो है अजर अमर हिस्से रिश्तों किस्से !
*Nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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