एक उम्र ऐ दौर के बाद
बस एक -2 ही ख्याल रहता है
वो ये की-2 तबियत या के सेहत
बस दूरस्त हो या के तंदुरुस्त
क्योकि उम्र पचास के बाद कुछ न कुछ हिस्से आ ही जाता है
सब धन गौण तुच्छ बस स्वास्थ्य खास बन जाता है
स्वास्थ्य है उम्र ऐ उस दौर में
तो धन का सदुपयोग किया जा सकता हैं
ओर धन का ज्यादा महत्व नही रह जाता है
तब जब स्वास्थ्य आपका दोस्त बन जाता है
यदि अस्वस्थ या रूग्ण है किसी कुछ बीमारी से
आधुनिक मेडिकल साइंस का युग
इलाज सब मिल जाता है
लेकिन धन बहुत जरूरी
धन से इलाज होता है
लेकिन आदमी मर- मर के जीता है
उम्र ओर इलाज दोनो वजह से वो डेंजर जॉन में होता है
फिर समय और साथ -हाथ भी जरूरी
यानी आपके साथ आपके अपने भी जरूरी
चाहे कितनी ही सुविधा संपन्न अस्पताल हो !
फिर इलाज सूट हो जाय ऐसी किस्मत भी जरूरी
यानी धन खर्च कर इलाज हो सकता है
लेकिन स्वास्थ्य वो पा
जाये पहले जैसा था
मुश्किल होता हैं
उम्र का उमरी पड़ाव ही ऐसा
की की ऊपर नीचे तो स्वास्थ्य का चलना ही है
फिर खाने में पसंद नही चलती
आदमी आधा तो वही मर जाता है
बस कदम कदम पर स्वास्थ्य से समझौता
बस यही -2
मुखड़ा दुखड़ा अंतरा रह जाता है !
*nk सनातन