द हाइट ऑफ टेस्ट क्रिकेट
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच ऐडीलैड, ऑस्ट्रेलियाई सरज़मी पर ड्रा होकर भी जीत गया । हाँ टेस्ट क्रिकेट जीत गया और करोड़ो टेस्ट प्रेमियों का दिल जीत गया। दिनाँक 7 जनवरी,2021 से प्रारंभ वैसे तो मैच 4 दिनों तक आस्ट्रेलिया के खेल से प्रभावी रहा और भारत पिछड़ता दिखा यानि मेजबान कंगारुओं का पलड़ा भारी रहा। मैच का 5 दिन बड़ा अहम था दोनों ही दलों के लिए विशेष कर भारत के लिए क्योकि उसके सामने असाध्य या विषम लक्ष्य था और दो अहम विकेट खोने के बाद भारत की हार सामने परिलक्षित या प्रतीत हो रही थी । पाँचवे दिन चोथे दिन के मैदान में थे नॉट आउट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ओर कप्तान अजिंक्य रहाणे । चुनोती मैच जीतने की थी 309 रन हाँसिल करने की यानी चौथी पारी के हिसाब से टेस्ट इतिहास के कठिनतम लक्ष्य में एक क्योको कुल लक्ष्य 407 रन जो क्वीन्सपार्क ओवल ,पोर्ट ऑफ स्पेन,वेस्ट इंडीज के ऐतिहासिक पन्ने की याद दिला रहा था जब भारत ने सुनील गावस्कर , गुंडप्पा विश्वनाथ, मोहिंदर अमरनाथ ओर बृजेश पटेल की नायाब ओर जाबाज़ पारी से असाधारण लक्ष्य 404 हाँसिल किया था ! चौथे दिन स्टम्प्स तक भारत अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों को गवां चुका था और खाते में 98 रन ओर मैदान में ओवर नाईट बैट्समैन थे कप्तान अजिंक्या रहाणे ओर चेतेश्वर पुजारा ओर शुरूआत मेजबान के पक्ष में की मेहमान टीम के नायक सस्ते में आउट हो गए। तब ऋषभ पन्त को क्रमोन्नत किया गया। यानी हनुमा विहारी से पहले। ऋषभ पन्त चोटिल भी थे यानी विकेट पर टिकना उनका लक्ष्य न था। आते ही उन्होंने घायल शेर खतरनाक होता है कि उक्ति को चरितार्थ करते हुवे अपना नैसर्गिक खेल खेला ओर टेस्ट स्पेशलिस्ट मिस्टर जूनियर वाल चेतेश्वर पुजारा की जुगलबंदी खूब चली एक तरफ आंधी थी एक तरफ नैया थी यानी तूफान ओर किश्ती साथ थी दोनो मंझील की तरफ बढ़ रहे थे और दोनों के बीच हवा और पानी के जोड़ – तोड़ से एक शानदार साझेदारी बनी और मैच आस्ट्रेलिया की झोली से निकलता दृश्यमान हो रहा था कि अति उत्साही ओर उत्कण्ठ कीपर बल्लेबाज ऋषभ पन्त अपना विकेट भेंट कर गए तब जब वह शतक के करीब थे ,इतनी जल्दी भी न थी और विकेट पर खड़े रहना समय की मांग थी लेकिन जल्दबाजी ओर अपरिपक्वता भी कोई चीज है दर्शन या फिलोसोफी में ओर ऋषभ पन्त ऐसे नाज़ुक वक्त पर वीरेन्द्र सहवाग बनने गए और अपने से ज्यादस अपने देश का क़ीमती विकेट गंवा दिया। हालांकि ऋषभ पन्त ने अपना पहला सैकड़ा सिक्सर मार पूरा कर वाहवाही लूटी थी लेकिन तब परिस्थिति अलग थी। खेर अब चेतेश्वर पुजारा से जुड़े संकटमोचक हनुमा फिर प्रजापालक विहारी भी । लेकिन अच्छी स्तिथि के सुखद मकाम पर दीवार गिर गई तब जब खड़े रहने की जरूरत थी । हालांकि पुजारा बहुत सजग और सतर्कता से खेलते हैं और खेल रहे थे लेकिन नसीब भी कोई महत्वपूर्ण चीज़ है “सनातन” ! ओर पुजारा पछताते हुवे पवेलियन की ओर लौटी एक दर्शक के रूप में की क्या होगा! खेर अब क्रीज़ पर अख्यात बेटिंग जोड़ी हनुमाविहारी ओर रविचंद्रन अश्विन थे। प्रसंशकों , टीम ओर कप्तान की उम्मीदें क़मझोर हो गयी थी। पांच अहम विकेट के गिरने के बाद जीत की उम्मीद करना बेमानी था । भारतीय प्रसंशकों में नैराश्य था कि मैच भारत गवां देगा। मैच जारी था लेकिन सोच में था फेन्स के की कितनी देर चलेगा।
लेकिन चमत्कार ….चमत्कार…. ओर आश्चर्य ….महाआश्चर्य …. अविश्वसनीय ….. अप्रतीम संगर्ष …..वाह ….हर गेंद पर दर्शकों की धड़कनें ऊपर-नीचे हो रही थी ! ओर दोनो एक विशुद्ध बल्लेबाज दूसरा विशुद्ध गेंदबाज बड़ी बहादुरी ओर धैर्य के साथ खेल रहे थे। जबरदस्त डिफेंसिव क्रिकेट खेल रहे थे क्योकि रनों के लिए जाना मतलब हार को निमंत्रण देना देना था। हनुमाविहारी रन बनाने की क्षमता रखते हैं लेकिन उन्हें हैमस्ट्रिंग ओर उठती हुई गेंद का प्रहार अनफिट कर दिया लेकिन उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और खेलते रहे। हिम्मत ऐ मर्द मदद ऐ खुदा …ओर किस्मत ने भी उनका साथ दिया और एक ऐसे मौके पर की कि उनका कैच उस वक्त प्रतिद्वंद्वी कप्तान के द्वारा पकड़ लिया जाता तो मैच की तस्वीर कुछ जुदा होती लेकिन कैच ड्राप हो गया। यानी भाग्य भारत के पक्ष में था ! और उसके बाद कोई मौका नहीं दिया भारतीय जोड़ी ने। हालांकि सांसे लगातार ऊपर चल रही थी
रक्तचाप हाई हो रहा था दोनो ही खेमो में ओर दर्शकों में। ओर स्टार्क ओर हेजलवुड की आग उगलती गेंदे छटक रही थीं, विकेट ओर बल्ले से आँख मिचौली खेल रही थी … कैच एक दो उठे तो भी फील्डर को छकाते हुवे दूर गिर रहे थे। आस्ट्रेलियन गेंदबाज पूरा ज़ोर लगा रहे थे लेकिन सफ़लता हाथ नहीं लगती। क्रिकेट में अवसर इक बार मिलता है तो फिर दूसरे के लिए लम्बे समय तक इंतजार करना पड़ता है और ऑस्ट्रेलिया के पास इतना लंबा वक्त न था। कप्तान पैने के कैच छोड़ते के बाद टीम ओर गेंदबाजों में नैराश्य साफ झलक रहा था। और भारत के इन दो बल्लेबाजों ने असाध्य कृत्य कर दिखाया था। अब सिर्फ एक ओवर बाकी था यानी सिर्फ छः गेंदे शेष जिस पर विरोधी टीम को पाँच विकेट झटकने थे। ये लगभग तो क्या शर्तिया असंभव था । मेजबान कप्तान ने एक ओवर शेष रहते समर्पण कर दिया कि अब कोशिश करना यानी दीवार को पत्थर मारने के समान है। यानि मैच अप्रत्याशित रूप से ड्रा हो गया। और भारत ने संभावित हार को बचा एक जीत से भी बड़ा कार्य कर दिखाया ओर अपने जज्बे ओर शौर्य को क्रिकेट इतिहास के महा पन्नो में दर्ज कर दिया। ये ड्रा भारतीयों के लिए किसी जीत से कम नहीं ! ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर ऑस्ट्रेलिया के सशक्त गेंदबाजी आक्रमण के समक्ष इस तरह की बल्लेबाजी वाकई ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को शर्मसार करने वाली है। ऐसे गेंदबाजो ने एक दो अवसर बनाये जो उनके हिस्से नहीँ आये लेकिन ऐसे धुरंधर एक से ज्यादा अवसर नहीं बना पाते वो भी अस्थापित बल्लेबाजों के खिलाफ तो उनकी गेंदबाजी क्षमता पर सवाल लाज़मी है। पिच या विकेट मदद करे तो एक साधारण गेंदबाज भी विकेट ले सकता है लेकिन दम तो वही हो जब एक गेंदबाज अपनी क्षमता, कौशल और पैनी धार से विकट चटकाए।
जो लोग या क्रिकेट प्रेमी या रासिये यानी छिछले दर्शक एक दिवसीय ओर टी-ट्वेंटी प्रारूप को तरज़ीह ओर पसन्द करते हैं वो जाने की टेस्ट क्रिकेट में रन खैरात में नहीँ मिलते। एक ,एक रन के लिए बड़ी मशक्कत के साथ तकनीकी कौशल बहुत जरूरी होता है। टेस्ट क्रिकेट में कुछ भी सीमित नहीं होता सिवाय पाँच दिवस के। इस टेस्ट मैच में दर्शकों ने एक समय रनों को गिनना बन्द कर दिया और एक एक गेंद जो मिल का पत्थर साबित हो रही थीं गिनने लगे थे। बस टेस्ट क्रिकेट की यही गहराई नही ऊँचाई है। टेस्ट क्रिकेट को सलाम। ओर भारतिय टीम को बधाई । अब श्रृंखला का एक टेस्ट शेष है ।श्रृंखला 1-1 से बराबर है। देखना ये है कि महान गावस्कर जीतते हैं या की बार्डर !
nk सेवक “सनातन”