धुंध खयाल ऐ दुनिया!

धुंध खयाल ऐ दुनिया!


◆ पके-अधपके खयाल ऐ आईना◆
करवां चौथ
तीज-त्योहार भारत महान का सांस्कृतिक व्यवहार ;
कारवां चौथ मांग रहे सदा सलामत यही विचार !
*nk सनातन
★जख्म देर-सवेर भरते है मन के शरीर के
मगर नासूर लाइलाज जो सिर्फ जलते हैं या के दफ़न होते हैं !
*NK सनातन
★ चाचा -चाची बच्चों की हर जुबां पर था
अब चाचा, चाचू हो गए हैं
ओर चाची तो बिल्कुल गायब हो…..
सिर्फ आंटी बन गयी है
चाचा आधे चाचू और आधे अंकल हो गए हैं !
(भारत और भारतीय सामाजिक परिप्रेक्ष्य में )
*nk सनातन
★ पल भर में तूने सारा जहान दे दिया
यू तो सब चांदो का अपना सिला
लेकिन ईद के चाँद से भी उनकी कहाँ तुलना !
★जीते जी मर गया लेकिन मैं जी गया
जुनूने इश्क वफ़ा ऐ पाक मैं तुझसे तर गया !
*nk सनातन
■ जन आंदोलन आक्रोश की आवाज़ वो हम कैसे बने !? ■
आप फुर्सत में हैं ;
शुद्ध देशी ठर्रे में बोलूं तो आप ठाले है !
लेकिन भरपेट हैं नही भी तो भरपेट आपके साथ हैं
रोज-रोज मीटिंग बुलाते हैं सभाएं बुलाते हैं
भई हमे तो रोजी-रोटी कमाना है घर बार
चलाना है
नॉजवाँ हैं कैरियर बनाना है !
★जंगल मे कौन महफूज है कोई नहीं
हरे पेड़ भी नहीं अब कटे तब कटे
ठूठ यानी पूरा हो तो किस्मत
नहीं तो मानव उपयोग हेतु कटना ही है !
*nk
★ जंगल में प्राकुतिक मौत पर अप्राकुतिक मौत भारी है
कहनो को जंगल सौंदर्य-प्रकुति का पर्याय है !
*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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