पक्षी ओर दयावान शहरिजनो के पडीन्दे !

*शहर में पडीन्दे तो खुब लगाए हैं तुने लेकिन…! *
शहर में मेरे पडीन्दे तो बहुत लगा रखे हैं लोगो ने / नगर जनों ने।
लेकिन अफसोस कोई पडीन्दा नहीं आता जल पीने।।
*शहर में मेरे अहाते हैं जिन्हें कॉरिडोर कहा जाता है
आंगन का चलन गायब है भौतिक सोच की दो कमरे ओर बना दु किराया आएगा आंगन फालतू जगह है
शहर में इसका क्या काम
आसपड़ोस में पार्क हैं बालक वहां खेलने चला जायेगा।
वहां से उसे कोई गायब कर गया या की किडनैप तो ये उसकी किस्मत
किडनैप करनेवाला तो घर आंगन से भी किडनैप कर जाएगा
ओर किराए के जो पैसे आते हैं अतिरिक्त उस पैसे की फिरौती से बालक छूट जाएगा
- पब्लिक सड़को पर पेड़ तो है लेकिन परिंदे न ही आते हैं अपनी चहक ले कर
क्योकि प्रदूषण प्राकतिक, मानसिक और गाहे बगाहे ओर अक्सर शोर पटाखों का बसेरा बसाए तो कैसे
*कोई परिंदा घोसला आशिया नहीं बसाता शहर ऐ गली कूँचे
क्योकि लोग उसे उड़ा देते हैं पटाखे का शोर कर - कोई शख्स शहर की कितनी स्वछता पसंद है
की घर के बाहर सड़क पर पेड़ हो तो उसे कटवा देते हैं
की रहेगा पेड़ तो कचरे का घर है
पत्ते डालियां पीठ आदि से परेशान होंगे
*शहर में अहाते हैं कि एक 6-7 फुट की बाइक स्कूटी ओर कार खड़ी हो जाये
ओर बाए है सेफ्टी टैंक दाएं हैं वाटर टैंक यू हम एक तरफ भारत महान तो दूसरी तरफ नापाक पाकिस्तान बसाए
*NK Sevak “sanatan”