बम-बम भोले- अलखनिरंजन
बम-बम भोले-अलखनिरंजन
*कुछ चालाक लोगो ने चमत्कार की शै पर
हाँ शै पर खुद की रोटियों, आस्था की तर्ज पर
कमज़ोर हाँ कमजोर मानसिकता के मर्ज़ पर
लौकिक शक्स को देखते ही देखते भगवान बना दिया ।
*बरस रहा है धन अकूत आस्था के नाम पर चौखट के उनकी
उल्लू सीधा उनका सरे आम सीधा सध रहा है
आस्था में रंगी अवाम ने उन्हें ऐश ओ आराम की राह दी
उन लोगो की दुकानें व्यापार खूब चल रहै है ।।
*हे भगवन तेरी कायनात में ये धतंग का खुला बाज़ार सज रहा है !
पूछता है “सनातन’ की ये क्या हो रहा है ?
सुनियोजित उनकी सोच को परवाज़ मिल गया है ।
ओर तेरे वजूद पे कम उनके वजूद पे ज्यादा एहतराम हो गया है।।
*ओर तो ओर पढ़े-लिखें भी विमूढ़ आस्था की आग पर ।
हे ईश्वर तेरे इल्म का यहां व्यापार हो रहा है !!
*NK सेवक