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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

बेगाना सफ़र

बेगाना सफ़र

” बेगाना सफर “
*ये सफर है सफर जिंदगी का
इस सफर मैं सब मुसाफिर-2
ये सफर कैसा बिना टिकिट का
ये सफर है…….

*जिंदगी यहां खुद परिचालक-2
दो चाहे मत दो,
यू ही चलता सफर जिंदगी का-2
ये सफर……

*चालक कौन यहाँ सबको खबर है-2
मगर है कौन असल मे किस को पुख्ता खबर नही है
मगर फिर भी- 2 रहता भरोसा उसी पर उसी का
सफर में……

*यहां सब भरम में
मानी मानताओं
ग्रंथ सूक्ति-सुक्ताओ में
वेद वैदिक ऋचाओं में
सिवाय उसके -2
कोई तोड़ भी तो नही
इससे आगे कोई सोच
पर सोच भी तो नही
जाने कब से सिलसिला
जगति का
सफर जिंदगी….

*मान्यता में सब रहे हैं रंगे
प्रार्थना करने वाले
ओर न करने वाले
सब भले नही हो बन्दे
सुख का तो पता नही
मगर दुख सभी का हिस्सा
सफर में…..

*सुख के प्रकारों का भी नही पता
लेकिन आईना दुख का हर किसी का
किसी का दिखता नही किसी का दिखता
सफर….

*जिंदगी के लफड़े-पचड़े
प्यार नही पर लेना -देना
किसी न किसी रूप में
रहते हिस्से सभी के
ये कैसा बेगाना मंझर सभी का
सफर ……

*भुगत रहे सभी यहाँ किसी न किसी रूप के जाए
है यही हक़ीक़त फ़लसफ़ा जिंदगी का
सफर सुहाना कहते हैं
रहता सदा कहाँ जिंदगी का
सफर…

*माने न माने मगर हकीकत यही है
पैसा है पर खरीद वही है तबियत निगहबान वही है
बचा ले अपने बूते भरम है
असल मे ऐसी औकात नही है
जो तय है वो तय है
इतिहास उठा कर देख लो दुनिया का
सफर,…..

*रुपिया तूमने -हमने बनाया
वैसे जिंदगी का कोई मोल नही है
तभी अकूत बेतहाशा
धन वाले भी मरे हैं
चाहे चंदन की लकड़ी चाहे सोने के ताबूत गये हैं
लेकिन परिणाम
राख-खाक राख-खाक इक सा
यही असल फ़लसफ़ा जिंदगी का
सफर…

*पैसा हो चाहे जितना हो डॉक्टर बड़ा ही कितना हो
रुतबा बड़ा ही कितना हो
खाक में मिलना उपाय चाहे जितने हो
नश्वर जहां का सच यही
नश्वर है यहां नश्वर सभी
अपने भाग्य ही जीना है
कोसो चाहे ऊपर वाले को
रोना रो ओ चाहे जितना
भाग्य बलवती यहां नायक-खलनायक सभी का
तभी तो रंक को राजा
ओर राजा को भिखारी होने के किस्से
यहां वक्त ही सिकन्दर वक्त ही कलन्दर
यहां वक्त रहा कब किसी का
सफर…..

*मर सब ऐसे ही रहे हैं
जा चाहे जैसे भी रहे हैं
उसकी सत्ता में सब किट- पतंगे
एक दिए कि लो और किस्से तमाम जिंदगी के
पेसो था बल पे उसके वो जी गया थोड़ा ज्यादा
भरम है भरम सभी का परम् सत्य तो बस इतना उसकी सत्ता में वक्त ही सिकन्दर
हकीकत में सिकन्दर कोई नही है सबक बस इतना
उसकी मर्जी के आगे आस्माल किसी का कुछ नही
तू उड़े आसमा पे ऊंचा जितना ऐ पंछी
जमीदोंज होना ही सबकी नियति
खबर है पर अफ़सोस खबर नही है
हे भगवन तू ही बता ये कैसी जिंदगी है
मतलब है पर मतलब कहा जिंदगी का
सफ़र….
*nk सनातन