“यहा कोन कविता कर रहा है?”
** यहाँ केवल कोन कविता कर रहा हैं
यहाँ केवल कविता कोन कर रहा है?
स्वांग रचाए अलबेला मश्खरा यहाँ
लतीफे में माया काया रच रहा हैं
यहाँ कविता केवल कोन कर रहा है
कवि अब कवि कहा रहा है !
और जो कवि ही रहा
कहा कोन पूछ रहा है
बिक वही रहा-जो ओछा कह रहा हैं
इधर उधर की जोड़- तोड़
ओन्धि पोन्धि बदरंग बेहूदी घटिया
कोमेडी पैरोडी हास्य लास्य कडिया
वो ही बिक रहा जो जूठ बोल रहा है
माँ की कविता करने वाले की माँ
बेचारी लाचार विवश असहाय मगर हाँ
जो भावनाओं में बहा खूब तालिया बटोर रहा है
खुद से स्व पत्नी से पीड़ित
आप मूक मोन दर्शक पत्नी प्रिया
बाप खुद का बेचारा वृधाश्रम ढूंढ़ता
खुद कन्या भ्रूण ह्त्त्यारा कन्या ढून्ढ़ रहा
खुद के बच्चो के लिए मिन्नतें कर रहा
लेकिन कविता कर तालिया बटोर रहा
कवि आज कवी कहा रहा
चापलूसी चिरोरी खुद की रोटिया सेक रहा
शेर को जब मनुष्य के खून का स्वाद लगता
वो आदम खोर हो जाता है
जब इसी तरह जब कवी को
हाँ धन का स्वाद लग जाता हैं
वो व्यावसायिक हो जाता है
फिर वो कविता नही करता
कहता वो हैं जो बिकता है
श्रोताओं नेताओं की बात करता हैं
भावनाओ को भुनाता है
स्वांग पर स्वांग रचता हैं
और अपना पेशा खूब जमाता है
nk सनातन