“रिश्वत-भ्रष्टता धरतीलोक का पारिजात फूल !”
💐रिश्वत-भ्रष्टाचार एक एक पारिजात फूल💐
[ इस ऐहिक सिस्टम से NEET जो होना चाहिए था Neat, अफ़सोस Split बन गया: जो काबिल थे रिश्वत के खेल में वंचित रह गए ,प्रतास पुरजोर था पेपर लीक से दिन-हीन रह गए ,,,,एग्जाम दोबारा होगा…हुवा …लेकिन कल और आज में बहुत फर्क होता है… अतएव निश्चित कल के एग्जाम में जो शत प्रतिशत दावेदार थे गारंटी नहीं कि इस बार सफल हो जाए….क्योकि दोस्तो दुनिया मे तकदीर, किस्मत,भाग्य भी कोई विरल चीज़ है कि कोलावेरी कोलबेरी वायरल हो हिट हो जाता है जबकि कोई दिलकश नगमा नहीं चलता ]
रिश्वत सिस्टम से गायब हो जाएगी
असंभव
असंभव
असंभव
क्यों क्योंकि रिश्वत ही रिश्वत खोरों को बचाती है
भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार को बचाता है
ऐसे में कानून असहाय है बेबस है लाचार है
कानून को धन के बल खरीदा जा सकता है
प्रभाव व रुपयों से प्रभावित, कमज़ोर किया जा सकता है
भ्रस्टाचार धरति का अमर फूल
जो कभी मुरझा नहीं सकता
और ईसकी खुशबू परमानेंट
यानी कि चिर स्थाई
जब तक मानव समाज के शरीर से पेट जुड़े रहेंगे
इसका फूलना बरकरार रहेगा
जब तक मनुष्य के भेजे में भेजा रहेगा
ये खेल यू ही आनंदित करता रहेगा
दिमाग और पेट के आगे सारे धर्म सारी नैतिकता मानवता शून्य
जहन है हृदय है आत्मा है लेकिन इसमें कौन झांकता है
बस लाश या मुर्दा निस्तारण (शमशान,क्रिमेंटरी,कब्रस्तान) स्थल या महाधाम के लिए अंतिम यात्रा में शामिल
राम नाम सत्य की गूंज
लेकिन दो घण्टे बाद फिर वही प्रज्जवल,ललक ,धनक,खनक,पलक ,झलक यानी हर सोच में पनप ही पनप
वो भी किसी भी कीमत पर
धर्म स्वार्थ के बाज़ार में गौण नगण्य
भूखे भजन न होत गोपाला सर्वत्र
देश की सरकार देश का प्रधानमंत्री कितना ही कितना ही ईमानदार वो कहां कहां ध्यान रखेगा भाईजान
क्योकि उसके दो हाथ
काम तो दूसरे लोग ही द्वारा करना है
और हर काम मे दरारे सुराख है
और ऐसे में भ्रष्टाचार मिटाना मुश्किल
बहुत मुश्किल वरन नामुमकिन !!
बात स्मार्ट यंग राजीव गांधी की
आप उदयपुर में एक पब्लिक सभा मे बतौर PM बोल रहे थे
आपने पब्लिकली कहा- मैं विकास के लिए केंद्र से 100 रुपये भेजता हूँ
आप जनता तक सिर्फ 10 रुपए पहुँचते हैं
इसके लिए आपके अपने लोग ही सलंग्न
आपको जागरूक रहना पड़ेगा
लेकिन हाय हर आफिस में शिकायत बॉक्स
मगर छुपा कर रखा जाता है
और कर भी शिकायत
उनके अपने लोग धनबल सब पाक हो जाता है
यानी बात साफ है भष्टाचार की जड़े गहरी हैं,पैनी हैं
हर महकमे में छोटी बड़ी भ्रष्टाचार घुस चलती है नल कुनेक्शन हो बिजली,रजिस्ट्री ,RTO ,कोर्ट,हॉस्पिटल ,शिक्षा विभाग ,टेलीफोन,राशन,
यानी कोई विभग्ग अछूता नही दूध का धोया नही
इस बीमारी से
फिर
मानसिक,सामाजिक,पारिवारिक, मेत्रिक,राजैनतिक,कार्यालईय भ्रष्टाचार की अलग परिभाषा
जो कदम कदम पे अपना काम करती है
और कितना ही सख्त कानून बन जाए पतली गली से तोड़ रहेंगे ही
क्योकि साबित प्रणानित, अप्रमाणित करने वाले तो सब पेट और दिमाग वाले ही होंगे !!
चाहे विभागों में कैमरे लग जाए
लेकिन रिश्वत लेने के कई तोड़
और जैसा “सनातन” ने ऊपर कहा
पकड़े गए तो धन ,सिफारिश,पहुंच में ताकत
की या तो मामला दबा दिया जाएगा
शिकायत करता पिल पिला ही रह जाएगा
या फिर सिस्टम खरीद
मुजरिम बाइज्जत बरी हो जाएगा
की साक्ष्यों के आभाव में क्योकि साक्ष्य बेचारे भाव मे बिक गए
यानी निचोड़ भ्रष्टाचार एक शास्वत व्यवस्था
यदि 90 ईमानदार भी हो
तो 10 भ्रस्ट उन नब्बे को जो ईमानदार
लपेट लेंगे सिस्टम के चक्र
बेचारे वो तब कहेंगे
हम क्यो रहे ईमानदार !!
*NK सनातन