शाश्वत सत्य: गृहिणी चिरायु पुरूषों को तुलना !

महिलाओं की उम्र पुरुषो से अधिक क्यों होती है~इक रिसर्च
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[इक मीठा सच]
यह सर्व ज्ञात और प्रामाणिक सत्य है की महिलाए पुरुषो की तुलना में अधिक उम्र तक जीवित रहती है….
क्यों …तो मेरे दर्शन के आईने अनुसार महिलाओं के अधिकाधिक जीवन के निम्न कारण हैं…यदि आप विवाहित है तो आप इन बिंदुओं को अंदर से महसूस करेंगे और यदि अभी आप (लड्डू खाए वो भी पछताए न खाए वो भी पछताए ~दोनो ही स्त्री और पुरुष ….कहावत चरितार्थ है..) दांपत्य सूत्र में नहीं बंधे है तो ये पूर्वानुभूति अनुभव ज्ञान आपको सहज करेगा जब आप इस सूत्र में बंध जीवन की खास पारी खेलेंगे….और सुहाना बचपन भूल जायेंगे …याद करने पर भी याद नहीं आयेंगा लेकिन थोड़े समय यानी 45 के बाद अनायास नैसर्गिक रूप से बचपन याद आएगा की क्या सुहाने दिन थे : ~की
चिंता रहित खेलना खाना और फिरना निर्भय स्वच्छंद..
कैसे भूला जा सकता है बचपन का वह अतुलित आनंद~कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान..
यदि कही पढ़ी हो तो दोहराव होगा…
तो प्रस्तुत है वो चरम महीन बिंदु,यथा~
1.शादीशुदा स्त्री को कमाने का कोई तनाव चिंता नही, दीर्घ रूप से ये पुरुष की जिम्मेदारी
2.स्त्री बच्चे जनती या पैदा करती है और मीठा दर्द उठाती है मीठा इसलिए की हर शादी शुदा स्त्री संतान ..और मातृत्व का लुत्फ उठाना चाहती है इस प्रक्रिया से वह विरांगना बन उभरती है और वह अधिकाधिक स्वस्थ और ऊर्जावान हो जाती है
- फिर वह बच्चो के लालन पालन और लाड़ दुलार में रम जाती है
- वह शादी करते ही गृहिणी बन जाती है जिसके अंतर्गत खाना बनाना ,साफ सफाई,झाड़ू पौछा ,रख रखाव ,बर्तन,कपड़े धोना आदि जिससे वह हमेशा अभ्यास यानी अप्रत्यक्ष व्यायाम की दशा में रहती है उसे अलग से योग वोग करने की आवश्यकता नही होती
नोट: को महिलाए नौकरी वाली है और जिनके घर में मिडवाइफ यानी आया या बाई आती है वो इस महातथ्य से अलग है..! - आदर्श विशुद्ध भारतीय भार्याऐ पति की सेवा सुश्रुमा जैसे सर की चम्पी,बदन की मालिश वालिश,
6.सामाजिक रूप से सक्रिय रहना
7.धार्मिक व्रत ,वास उपवास करना
8.सांस ससुर ननद रिश्ते बाती का राजदार बनना
9.शमशान नही जाना और मौत की असल सूरत और असल दर्शन को ले कोई आत्मज्ञान और चिंतन मनन यानी कोई चिंता नहीं
10.कोई और बिंदु हो तो पुरुष नर नारायण समाज यहां रख मानले
*Nk सनातन