बॉलीवुड गीत-संगीत
गीत और संगीत एक दूजे के पूरक हैं और इन दोनों की संगत या जुगलबंदी से साज ओर आवाज़ का अनुपम, विरल ,तरल जोड़ बनता है और ये जोड़ ब्रह्मांड को गुंजायमान कर देता है ओर स्वरित हो आभा को, फिज़ा को सुरमई करते हुवे सीधे सर्वशक्तिमान से साक्षात करता है ओर उस साक्षात से मन मंदिर बन जाता है और आध्यात्म ,खुशी के ज्वार से मन स्वर्ग की दुनिया मे हिलोरे मारने लगता है। गीत-संगीत से परम् तत्व को पाया जा सकता है और इसीलिए सभी महाग्रंथ गीत-संगीत विधा से ओतप्रोत हैं। और उन्हें सुनते हुवे ओर सुन कर एक बार व्यक्ति उस दुनिया मे पहुँच जाता है जहां जाना सिर्फ मरने के बाद ही सम्भव है। धरती लोक की इस अनन्य विधा गीत-संगीत की गूंज से स्वर्गलोक में आरूढ़ गंधर्व, देव, गण, आदिदेव नटराज, विष्णु , नारद मुनि ओर स्वर-लय की महादेवी माँ शारदा मुदित हो धरतीलोक पर उतरने ओर विचरण करने को लालायित हो जाते हैं।
सुर-ताल को समझना एक आम व्यक्ति के बस का रोग नही विशेष कर शास्त्रीय संगीत । यूं ही राग- रागिनी को समझना भी किसी आम जन के बस का रोग नहीँ। इसमे पढ़ा- लिखा होना भी इसकी गारंटी नही ! इसके लिए आपके पास एक मर्मस्पर्शी ओर ललक- हलक वाला हृदय जरूरी है।आप किसी कोयल ,मयूरी , गौरेया ,तोता -मैना ओर पक्षियों की निरर्थक ध्वनि में भी लय-ताल ओर देवत्व या अर्थ महसूस करते हैं तो मान लो कि आप संगीत और गीत के अनंयतम भक्त रसिक हैं !
ये दैहिक नही वरन दैविक कृत्य है , परख- प्रकति है।
भैस के आगे बिन बजाने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए लेकिन कभी – कभार जाने-अनजाने हो जाती
है । लेकिन उस माधुर्य को कान में पड़ते ही ऐसे निर्जीव लोग भी उसके कद्रदान हो जाते हैं जो संगीत विधा से बेखबर होते हैं। वैसे भैसों का तो पता नही लेकिन केरल में गायों के तबेलों में वैज्ञानिक प्रयोग से साबित हुवा है कि गायों को संगीत सुनाने पर उनकी दूध देने की क्षमता में वृद्धि नॉट की गई है। गाय भगवान कृष्ण की पसंदीदा रही है ओर स्वयम ग्वाल पाल बन गायों को चराया है। स्वयं श्री कृष्ण ने ग्वाला मुरारी बन मुरली की तान ओर धुन से गौशक्ति को मंत्रमुग्ध किया था कि उनके एक ही सुर से सारी गौ माताएं उनके समीप आ जाती थी झूमती हुई। मैं बात कर रहा हूं भारतीय शास्त्रीय या क्लासिकल गीत-संगीत की जो ब्रह्मांड में अजर- अमर है। लेकिन इसकी पहुंच आम न होकर खास रही है यानी राजा-महाराजाओं, संभ्रांतों, रसूखों तक या फिर बड़े और ख्यात देवालयों में इसकी गूंज इसका नाद सुना जा सकता था लेकिन इसके लिए आपको गहनतम भक्त वृन्द होकर ही जाना होता था । आध्यात्म का आकाश लिए, पुट लिए बोल भजनाइ अर्थात भक्ति रस से सराबोर होते थे ओर प्रस्फुटित स्वरलहरियों से मस्तमगन समां में मन को असीम शान्ति का सुकून मिलता था ।
लेकिन मैं बात कर रहा हूँ बॉलीवुड की जिसने गीत-संगीत को देखते ही देखते आम बना दिया। बॉलीवुड के स्वर-साधको ने गीत-संगीत को वो ऊंचाइयां दी कि आज हर आम ओ खास की पहुँच संगीत-गीत तक सहज रूप से हो गयी। बॉलीवुड ने कई नायाब स्वरलहरियों-धुनों से गीत बोलो से, दर्शन से ,मनोविज्ञान से, सांसारिक सत्यों से आम जन को अवगत कर उन्नत कर दिया और मनोरंजन सस्ता-सुलभ कर दिया। आज गीतों की बात करे तो हज़ारों गीत हैं जिनका गीत-संगीत अजर-अमर सा प्रतीत होता है ओर लगता है कि स्वयम माँ धवला ने इन्हे गढ़ा है, रचा है। तकनीकी आकाश के कारण आज सिर्फ एक बटन क्लिक करते हैं और अपन अपनी खुशहाल -मस्ती की दुनिया मे तैरते- गोते लगाने लग जाते हैं। यूँ तो सुखनवरों ,गीतकारों, गुलुकारों की फेहरिस्त लम्बी है जिसमे कुछ नामवर कुछ अनाम हैं। वक्त की धुंध ने उन नामों को ढक लिया है या की धुंधला कर दिया है। लेकिन तकनीकी क्रांति ओर सहज सुलभता से उन भूले-बिसरे लेकिन महान संगीतज्ञों ओर पार्श्व गायकों के उस माहिर फन तक पहुँचा जा सकता है ओर उन गीतकारों को सम्मानजलि दी जा सकती है।
सोशल मीडिया और विकिपीडिया ,इंटरनेट के जरिए उनकी ख्याति को जाना जा सकता है कि वो धरती या वसुधा के होकर भी सुधा छोड़ गए कि जिसके सुपान से ही व्यक्ति जी उठे । यानी ये गीत -संगीत बोझिल ओर आनंदित जीवन मे संजीवनी या के प्राण फूंकने का काम करते हैं या यूं कहें कि इस सांसारिक जीवन की नश्वरता ओर ऊँचाई-नीचाई को धरातल ओर व्योम दिखाते हैं। अमर संगीतसाधको ओर संगीतकारों में बहुत फर्क है। क्योकि पंडित जसराज,भीमसेन, रविशंकर , अमज़द खान , बिस्मिल्लाह खान,सुब्बा लक्ष्मी………
……………. को संगीत साधक ओर पुजारी की श्रेणी में रखा जाता है जबकि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल , कल्याण जी आनंदजी रवि जैन ख़य्याम , नोशाद संगीतज्ञ रहे जिन्होंने व्यवसायिक रंग देकर व्यावसायिक ऊंचाइयां दी। गीतकार जिन्होंने अजिम ओर आला शब्द पिरो कर क्या खूब दर्शन- भाव भरे ओर पार्श्व गायकों के.ऐल. सहगल , तलत महमूद, मन्नाडे,कवि प्रदीप मुकेश, रफ़ी, हेमन्त कुमार , किशोर , महेन्द्र कपुर, शैलेंद्र सिंह,येशुदास, जगजीत सिंह , अनूप जलोटा, सुरेश वाडकर , ऐस बी सुब्बलक्ष्मी जी, सुधा रघुनाथ , लता जी ,आशा जी, हेमलता, शारदा, अनुराधा पोडवाल , कविताकृष्ण मूर्ति , सुरैया , नूरजहां ,शमशाद बेग़म ,गीता दत्त जिनके स्वर ने भारतीयो के मन को मंदिर तो कभी लाइव आरकेस्ट्रा बना दिया जिसे सुन हर आम ओ खास झूमता – ध्वनित- उद्देलित होता नजर आया। महान गीतों की सूची लंबी है लेकिन मेरी पसंद के कुछ उम्दा, कालजयी ओर मनभावन, मनछुअन गीतों के मुखड़े मैं साझा कर रहा हूं जो सदाबहार होकर आपकी भी श्रेष्ठ ओर परमानन्द सूची में शुमार हो । वैसे पसंद की जहां तक बात है अलग-अलग हो सकती है लेकिन कुछ पसंद सार्वभौमिक होती है जो हर काल मे हर पीढ़ी में सर्वप्रिय होती है, ओर ऐसे गीत सदाबहार होते हैं जो हर काल मे श्रवणीय-मननिय,आदरणीय ओर अप्पीलिय होते हैं। ये नग्मे हर काल मे हर पीढ़ी को भाती हैं, रंभाती हैं। तो दोस्तो ये रही वो अनुक्रमणिका उन महान नगमों की जिनका संगीत, शब्द भाव,शिल्प अनुपम ओर विरल हैं। यथा– ……………
*वैसे तो 90 के दशक से पूर्व कई गीत मेरी पसंद में हैं लेकिन
निम्नाकिंत गीत दिल को छूते हैं—ओर सदाबहार दिल अजीज हैं—-
1.एक प्यार का नगमा
2.संसार है ईक नदियां
3.आज दिल पे कोई जोर
4.जिस पथ पे चला
5.कहानी किस्मत की
6.तू मिले तो पुछू तुझसे
7.मेरा तो जो भी है मेरी
8.कस्मे वादे प्यार वफ़ा
9.किसी राह में किसी
10.ओ मेरे सनम ओ मेरे
11.जाने क्यो लोग मोहब्बत
12.कोई पत्थर से ना
13.अगर मुझसे मोहब्बत
14.चल अकेला चल
15.ना कोई उमंग है
16.बहारो ने मेरा चमन
17.बाबुल की दुआएं
18.रोते हुवे आते हैं
19.जिसका कोई नही
20.मधुबन खुशबू देता
कही दिप जले कही
22.मेरी प्यारी बहनिया
23.नफरत कि दुनिया
24.मेरा प्यार भी तू है
25.बहारो थाम लो
छोड़ दे सारी दुनिया
रंगीला रे
28.तेरे मेरे बीच मे अब न
29.अभी तो हाथ
होठो पे सच्चाई
बस यही अपराध
जुबा पे दर्द
पुकारो मुझे फिर
34.रिमझीम गिरे सावन
35.मेरे दिल मे आज
अफ़सोस 90 के बाद मुझे कोई आवाज़ -साज पसंद नही आया क्यो……
पर आप अपने मत से सोच सकते हैं ! कुछ कर्ण प्रिय गीत आये और कुछ मधुर आवाज़े लेकिन उनके हर गीत में वो बात नही रही …. जैसे मुझे जमाने मे देखे हैं रंग हज़ार….
बहुत पसंद है लेकिन अभीजीत भट्टाचार्य का ओर कोई नगमा नही भाया….खेर हर पीढ़ी की अपनी पसंद होती है …. ओर व्यक्ति को पसन्द ना पसन्द पूरा हक है।
Star Maker पर मैंने अपनी पसंद के कुछ 40- 50 फिल्मी गीत गाये हैं….. आप जानते हैं मैं गाने का व्यावसायिक शोक ,जुनून रखता हूं!
*NK sevak “sanatan”