सीवरेज ; चेम्बर vs चेम्बर
जब पढ़ते हैं
चैम्बर ऑफ कॉमर्स
चेम्बर्स ऑफ सी ऐ
चेम्बर ऑफ कलेक्टर
चेम्बर ऑफ पी एम
चेम्बर ऑफ प्रेसीडेंट
चेम्बर ऑफ प्रिंसिपल
पढ़ कर बड़ा फ़ख्र होता है
उस सुशोभित पदाधिकारी को भी
ओर शब्द बड़ा वजनदार
बड़ा सुसज्जित आलीशान
वाह वाह धन्य धन्य धन्य
लेकिन आज पढा
दैनिक भास्कर अखबार में
हाँ सी एम गहलोत साब का बयान
की कि कोई भी -2
सफ़ाई कर्मचारी न उतरे
न उतरे चेम्बर में
सीवरेज की सफाई के लिए-2
चेम्बर में उतरने से
कई घटनाएं हुई हैं
अब नहीं होनी चाहिए
ओर सफ़ाई के लिए-2
सिर्फ मशीन का ही -2
प्रयोग हो
संक्रमण चाहे कोरोना हो या कोई और बीमारी का
इसमे सफ़ाई कर्मियों की
बड़ी बहुत बड़ी भूमिका होती है
स्वच्छता कर्मी देश को मुख्यधारा से
जोड़ने का महत्ती काम करते हैं
अब शब्द एक -2
लेकिन अर्थ अलग-अलग
एक उच्चता से तो दूसरा
निकृष्टता से सम्बद्ध
अब वो फ़ख्र करे या कैसे
उस शब्द रचनाकार को
की कि समान अर्थ रख दिया
लेकिन निकृष्टता सब
मनुष्यों में बसती है
अपशिष्ट से दैनिक जीवन मे गुजरना ही पड़ता है
राजा हो या रंक
इस कड़ी में सब सम
बात एक ओर पते की
की उन चेम्बर में बैठने वाले
निकृष्टता का पर्याय रहे हैं
शरीर से नही
आचार-विचार से
जबकि
उस चेम्बर में उतरने वाले
वाकई निकृष्टता को दूर करते हैं
वातावरण शुद्ध करते हैं!
*NK सेवक “सनातन”