N. K. Sevak
+++क्षमा के साथ
(लेखक पत्रकार श्री असफल्जी का whatsapp पर ग्रुप है -जो विशुद्ध कवि और कविताओं का मंच है मेने कुछ क्रांतिकारी और कडवे वचन के लिए प्रसिद्ध श्री श्री तरुण सागर मुनि महाराज को प्रति कुछ प्रश्न किये अकविता में कुछ -2 कविता में और जिस पर किसी कवि वर ने तो कुछ प्रतिक्रया नही की लेकिन ग्रुप एडमिन जो की इक खुद कवि हैं ने मुझे रिमूव किया इस तरह इक वरिष्ठ कवि ने कनिष्ठ कवि की हत्या कर दी। इस तरह खुद अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का पैरोकार इक कायर इक भीरु निकला अफ़सोस रहा..!
नार्वे अभी स्वतंत्र विचारो के पेरो कारो में प्रथम स्वीडन द्वितीय इंग्लैंड 46 और अमेरिका 49 और अपना महान भारत 146 वि पायदान पर
गर्व की बात की बात हमारा पडोसी 149 पर यानी प्यारा पिद्दी सा राष्ट्र जिसे अस्तित्व में लाने की जगन्य भूल हमारे राजनेताओं ने की और वो नासूर बना हूवा है जाने कब तक…?
*धन्यवाद सर की आपने मुझे किनारा कर इज्जत बक्षी
हर व्यक्ति दो चेहरो के साथ के साथ बना है पर भक्षी
और चलता है और मुखोटा ओढ़े रहता है।
कवि समाज भयभीत और भीरु अफ़सोस है।
अफ़सोस सुधारवादी क्रांतिकारी कवि आहे भरता है
यदि मीडिया जो चोथा स्तम्भ कहता है
सुधार वाद को तरजीह नही देता और डरता है
तो दुखद है ग्लानि है धिक्कार है
इसीलिए नाबोलकर महाराष्ट्र में मारे जाते है
असीम त्रिवेदी जेल में पीले जाते हैं
और कबीर जो बहुत बड़े सुधारक रहे हैं
कवि ऐसे को फिर आप कवी क्यों मानते हैं?
*श्रीमान असफल जी -आप का नाम वेसा काम आप कितने ही कामयाब हो जाय अफ़सोस असफल ही रहेंगे….!
मेने जो विचार रखे हैं वो NDTV पर चीफ रजत शर्मा ने सरे आप देश के चेनल पर श्री तरुण सागर मुनि को पूछे थे कोई ऑब्जेक्शन नही हूवा जिसे सारे देश ने सूना कई बार रीटेलीकास्ट भी हूवाऔर मुनि श्री ने सारे सवालों के जवाब दिए जबकि वहा दर्शक श्रोता भी थे..!
सर इक बार व्यक्तिगत क्षमा माफ़ी आपसे…!
nk सेवक “सनातन”