यहां जहां मे सब उल्काये हैं!
वक़्त छीन लेता है हर चेहरे की रौनक
एक दिन सितारों को भी खाख में मिला देता है।
(adopted couplet piece of someone)
(dedicated to Vinod Khanna on his sad demise on 28 april 2016)
यहाँ कोई सीतारा नही
सब उल्काए हैं,धूमकेतु
वक्त या के बेवक्त क्षरण
यही इस धरा का चलन
सिकंदर कलंदर पैगम्बर
मसीहा अवतार जानेमन
सब के हुवे हैं यही हश्र
ए वक्त पे इतराने वाले-2
ज़रा देख तस्वीर कुछ आगे की
वक्तो के पेबंद में सब इक रोज
सिमट जाएगा जीर्ण शीर्ण हो जाएगा
फट जाएगा मिट जाएगा
अनंत में शून्य में सब खों जाएगा।
nk सनातन