उपेक्षित समाज आर्थिक रूप से राज करता है!!!!!!!
*कि….. र ! दो ताली ओर पौबारह
शापित समाज उपेक्षित समाज
लेकिन आशीर्वाद देता है
जिसे शगुन माना जाता है रस्मे प्रक्रिया मानी जाती है
धार्मिक पौराणिक मान्यताओं में ये भी शुमार है
आज के दौर में इनका असोसिएशन
फिर जिद्द या ढिठाई -दादागिरी
हां नेग के नाम
चार-पाँच की…. नर और डीलिंग घण्टे भर
मेजबान मेहमानों को संभालने या किन्नरों को
फिर राशि उनकी माँगी नहीं मतलब उन्हें हैसियत घराती
देना भी ज़रूरी नही तो हथियार नहीं हथियार बताती
मेहमान-मेजबान शर्म से पानी हो जाये जो स्तिथि डराती
अब उन पर कोई कानून का शिकंजा नहीं
हो तो भी पुलिस भी डरती शर्माती घबराहती
इन की… रो के मुखबिर नजर रखते चारो ओर
कहा शादी पार्टी परसादी
फिर उनके ठाठ देखे महंगी कार महंगे मोबाइल
आस पास जी हुजूर गुर्गे ओर टोली
“सनातन” पैसे उनके मुँह मांगे नहीं देने पर निर्लज्जता
हां पर कोई कानून नहीं क्या है तो उसका उपयोग कहां
वैसे ये शेयर से हट्टे कट्टे चाहे तो करे काम धाम
लेकिन मिलते फोकट में दो ताली तो कोन करे काम
एक मजदूर ओर पढ़ा लिखा बेरोजगार नहीं कमाता
हां बारह घण्टे की जी तोड़ कर मेहनत मजदूरी
ओर देखो इनकी इनकम नही कोई आयकर की धुरी
हो सरकार की भी इन पर लगाम
हर जश्न में हो एक निश्चिर अशबाब या रकम
ओर उसकी भी कटे रशीद ओर हो GST की शमशीर
हर शादी ब्याह में ठीक एक घण्टे होती उनकी बवासीरी
ये पढ़े लिखे समाज की नहीं है तस्वीरे
*nk सनातन