~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

एक सार्वजनिक प्रेमिका

★एक सार्वजनिक प्रेमिका★
भाग 1
मैं एक सार्वजनिक प्रेमिका
शास्त्रीय देव भाषा मे कहे तो गणिका या नगरवधू
जो चाहे तब खेले मुझसे
बस जेब भारी हो शर्त यही
एक कुमार नॉजवाँ मोहब्बत का मारा
उस ज़ोहरादिलआरा के कोठी पहुँचा
झूठा ही सही अक्स ऐ मोहब्बत की ख्वाइश में
वह देखता है निहारता है
शानदार सज़ा-धजा दरबार ऐ हाल
नोकर-चाकर, गार्ड -गणिकाएं भरपूर
ओर मनोरंजन के सारे साजो सामान
संगत ऐ उस्ताद कलाकार नृत्य कला की जादूगरनिया
वह नृत्य देख आफरीन कुर्बान हो जाता है
उस कोठी ओर कोठे की मालकिन या रानी
बला सी खूबसूरत उर्वशी मेनका सी हामी
वो खासमखास शख्शियत
वो विश्वश मांग बहुत ऊंचे दाम ही आती सरे दरबार
सुना बहुत था कुमार ने देखने को बेताब
कुमार मोहब्बत में चोट खाया प्रेमी
था बहुत ऊंचे खानदान ओर समृद्धतम रसुखि
दाम आफर कर जाता है दिवान ऐ खास
देखता है दीवार पर 12 शाही धनी कुबेरों की फ़ोटो
साथ मे एक-एक लड़की की फ़ोटो
वह हैरान हैं देख देख सोच कर
तब गुरु गणिका अवतरित उतर
लगा सारी जन्नत जमी पर उतर आई है
देखते ही मेहताब ऐ आफताब
कुमार मंत्रमुग्ध हो जाता है
तुलना में कहता है ऐ मेरी खोई मोहब्बत
कुछ भी नही समक्ष इस हुस्न ऐ कायनात
लेकिन संभलता है सुकूँ भर के
ओर पूछता है ऐ हुस्न की मलिका
ये चित्र जो लगे हैं इनका क्या राज है
वो कहती है ऐ बांके-छबीले कुमार
इस दीवान ऐ खास में आने की नहीं किसी ऐरे-गेरे की औकात
इसमे आने की शर्त सिर्फ धन-रसुखि -कुबेरी नहीं
है जरूरी सजीला,गठीला, रूपवान,रंगीला तन-मन-बदन
यानी इसके लिए जरूरी वेरी वेरी हेंडसम ओर मांसल मर्दाना युवान
ओर तुंम मे है वो बात
जो हमने देखा अपने र रियाइस हाल
जहां एक दर्पण लगा है दिशा ऐ अंदाज ख़ास
तो सुनो इन तस्वीरों का दिल ऐ राज
ये सब आशिक यार दिलदार मेरे मैं रही सिर्फ़ दिलरूबा धन की यार
ये जो शख्शियत हैं नामी गिरामी
ओर ये है उनके प्यार का तोहफा उनका
जिसे लोग इज्जत से कहते हैं हरामी
अब हरामी कौन ये तुम सोचो
ये मासूम निर्दोष खूबसूरती संतति या फिर बॉप इनके रसुखि
कुमार सवाल करता है इनके बेटे
टोकती है बीच मे ही मलिका जानी
की जो मुझसे मोहब्बत करते हैं
उनके लड़कियां ही होती है
ओर तुम जानते हो जो भी यहां तशरीफ लाता है
मेरा प्रेमी ही होता है
मैं किसी से प्रेम नही करती
क्योकि प्रेम मेरा धर्म नहीं मेरा व्यापार है
ओर व्यापार में व्या पहले आता है प्यार नहीं
कुमार कहता है तुम इस वक्त मोहब्बत के मारो का मसीहा हो
पैसा धन के नाम ही सही
पानी सबको पिलाती हो
यहां आने वाला प्यासा नही रहता जन्नती बात है
तुम पाक साफ नायाब हो
तुम इसे पेशा कह लो
नज़र सोच में मेरी
तुम देवी ऐ ख़ास हो
चलो एक ओर बेटी ही सही
आ जाओ बाहुपाश में मेरे
आलिंगन वो देवीक तहा ऐहिक दैहिक वो खास हो
की किलकारी गूंजेगी एक मेरे नाम
चाहो तो ये किलकारी अंतिम राज नहीं
ये नाम सरे आम होगा
की हां ये मेरी बेटी
घर मेरा इससे आबाद हो
जमाना है इसकी छद्म सोच का क्या
ये मेरा फैसला है वो बेटी मेरी जिंदगी का साज हो
तुम मेरी भार्या ओर उस मेहमान की मां
तुम मेरे संसार की गुल ऐ सौगात हो
*NK सेवक ”सनातन

★★भाग -2★★
नृत्यांगना बला की खूबसूरत
असल मे बोले तो हूर या परिजादी
नृत्य ऐसा की स्वर्ग की रंभा ,तिलोत्तमा
लेकिन आखिर वह औरत
उसका भी अपना जिस्म
उसका भी अपना मन-यौवन ओर इच्छाएं ,कामेंच्छाएँ
सो उसे जो भी भाता
हालांकि भाता मुश्किल से
क्योकि उसकी इच्छा का हर कोई तो नहीं होता
यानी ज़ोहरा की चाहत
हर कोई सिकन्दर नहीं होता
इसलिए उसके शयनगाह में जो बहुत बड़ा-आलीशान है
उसमें 12 भित्तितेल चित्र
सब स्मार्ट नवयुवान खुशमिजाज, रंगीन
सबके साथ एक लड़की की तस्वीर
जो बहुत खूबसूरत और मलिका ऐ हुस्न
कुमार पूछता है राज ऐ तस्वीर
तब हुस्न की महारानी बताती है
राज ऐ मोहब्बत हसीन
की ये सब मेरे रूप के दीवाने हैं
बस तुम्हारी तरह दिल बहलाने आये मेरी महफ़िल में
ओर फिर मैं उनके दिल की महफ़िल में छा गयी
पहल हुई बड़े मुंहमांगे दाम तय हुवे
ओर हमने आलिंगन की ऊंचाइयां छूई
ओर वो तो चले गए मेरे रस्क ऐ दरबार से
ओर वापस न आये
क्योकि मेरी शर्त थी
की बस एक बार ही मैं
एक बार ही मैं मन तक पहुँचूंगी
इसलिए इस चौखट पर तुम्हारी जगह नहीं होगी
वो चले गए लेकिन मैंने उनकी निशानी पा पाली
ओर ये बारह शख्स कभी मेरे दिल के मालिक बने कुछ देर
ओर ये हर चित्र के साथ एक जनाना
यानी उनकी अपनी दुखतर या के बेटी
तुम पूछोगे किसी के भी संसर्ग से लड़का नहीं
तो जनाब जो हुस्ना से मोहब्बत करे हुस्ना ही पैदा होगी
लड़के का तो कभी सवाल ही नहीं
हां हुस्ना को अगर किसी से मोहब्बत हो जाय
तो फिर लड़का ही होना है
लेकिन अफसोस आज तक वो मर्द ही दिखा न मिला
जिस पर हुस्नआरा का मन हारा
ओर तुम तेरहवें आशिक हो जो मेरे दीवान ऐ ख़ास शयन आसमा में आये हो !!!!
*NK सनातन