वैभव सबकी चाह लेकिन ये प्राण जिसकी अलग आह !

वैभव सबकी चाह लेकिन ये प्राण जिसकी अलग आह !

हमारा लक्ष्य वैभव,ऐश्वर्य,रसूखी भोग विलास प्राप्त करना है जबकि आज इक ऐसे पुरुष का जन्म है जिसने ये सब शाही प्राप्तियां जो उन्हे जन्म से ही प्राप्त हुई थी स्वेच्छा से त्याग दिया क्योंकि आप सम्राट सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के वहां अवतरित हुवे थे!
आप जैन पंथ के 23 वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ के शिष्य होकर केवल्य यानी सच्चा ज्ञान अर्जन किया और सत्य,अहिंसा,अपरिगृह आदि पर जोर दिया….आपने अवहेलना ,
छूआछुत और शोषण झेलने वाले को गले लगाया उन्हे समता का अधिकार दिया….भारत में इस पंथ के 50 लाख अनुयाई हैं और सम्मेदशीखर इनका महातीर्थ है…ये पंथ मानव प्रधान है और तीर्थंकर ही इस पंथ में भगवान के रूप में पूज्य है….वैसे आदिनाथ ऋषभदेव जो इक चक्रवर्ती सम्राट मोह माया त्याग ईश्वरीय ज्ञान और सत्य से अवगत हो राजपाठ त्यज इस पंथ के संस्थापक बने जिन्हे हिंदू धर्म ग्रंथो में श्रृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जी के 24 अवतारो में से इक माना जाता है वैसे ही ऋषभ यानी नंदी जो ऋषभनाथ को भगवान शिव का भी अवतार माना जाता है लेकिन ये तथ्य है की हिंदी धर्म से ही इनके संस्थापक और तीर्थंकर हुवे और जैन यानी इंद्रिय विजई… आदिनाथ ऋषभदेव का भव्य मंदिर उदयपुर के इक कस्बे ऋषभदेव में है जो केसरिया नाथ धुलेवनाथ के नाम से प्रसिद्ध है ! ये मंदिर हिंदू श्वेतांबर दिगंबर सभी समान रूप से श्रद्धा का केंद्र है…क्षेत्र के आदिवासी वर्ग की
ईसमे बड़ी आस्था क्योंकि धुला नामक एक भक्त ने उनकी मूर्ति स्थापित की थी…जो स्थानीय लोगो में धुलेव नाम से भी प्रसिद्ध है..
सभी जैन बंधुओ को पावन महावीर जयंती की हार्दिक बधाइयां !
जैन समुदाय के कुछ अग्रणी सामाजिक कर्ता धर्ताओ ,नेताओ ने संसद में आंदोलन आवाज उठाई की उन्हे भी अल्पसंख्यक घोषित किया जाए बार PM नरसिम्हा राव जी के शासन में ये महान कार्य हुवा और 24 जनवरी, 2014 अल्पसंख्यक का दर्जा भारतीय संविधान अनुसार प्राप्त हुवा… उन सब राजनेताओं,समाज वीरों,विचारकों इस हेतु विशेष बधाईयां की जैन पंथ के मानने वालो को इसके अंतर्गत राजकीय लाभ मिलने शुरू हुवे और इक विशेष पहचान मिली और जय जिनेन्द्र का अभिवादन बुलंद हुवा….
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जय जिनेन्द्र चंपक चाचा,टप्पू, दया और जेठालाल के मुख से बार बार छलकता है …संकट में दया जी हे माताजी पुकार गरबा खेलती है धारावाहिक में उन्हे गरबा क्वीन कहा गया है….यानी गहनता से देखा जाय तो हिंदू और जैन पूजा पद्धति में लगभग समानता…और कई उदार जैन हिंदू धर्म के देवी देवताओं को समान रूप से मानते है..!
*Nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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