मेरा मंदिर ध्वंस कर बाबरी मस्जिद बनाई गई
मैं मर्यादा में बंधा कभी शक्ति प्रयोग नही चाहे हो सम्मुख आतताई
मेरे आराध्य शिव सोमनाथ भी ध्वंस हुवा
शिव भी शांत नहीं कोई चमत्कार
क्योंकि भस्मासुर भी बिगड़ा तो ली मेरे मूल श्रीविष्णु की मदद
लेकिन मैने माना ये दुनिया मेरी बनाई
बड़ी दानवी मेरे ब्रह्म से शक्तिआई
मेरे ही इल्म देरो धरम भूली भुलाई
तब मैं वासुदेव अवतार कृष्ण बनता हूं
अपनी क्रूरता मामा कंस दुश्वारी
मेरे ही जान का दुश्मन किए दुर्दन्य जतनाई
फिर प्रेम जंग में सब जायज
और खुद के मामा का वध वधाई
यानी मुझे उस सत्य युग के सबब वनवास
रावणाई
लेना पड़ा जन्म बन कृष्ण अवतारी
मैं श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम ता जीवन साधारण
सिर्फ इक बार आपा खो धरा रोद्र रूप
तब जब समुद्र देव करे अट्टहास मेरे विनय रूप
लेकिन कोप मेरा देख समुद्र देव झुके तुरंत
लेकिन मेरे कृष्ण रूप में दर्शन मेरा दीर्घ
जैसे के साथ तैसा साम दाम दण्ड भेद सुर्ख
लेकिन मेरे दोनो स्वरूप महावतार
दोनो बने कालजई परम उद्धरण
श्रद्धालु दोनों के सम रम बबम बबम
लेकिन दोनो का प्रयोजन सुख शांति परम
राम नवमी आज ही नही
रमें,बजे झूमे, खेले,नाचे
रोज रोज
की देश दुनिया बने आराध्य यही स्वर्ग जन्नत !
जयतु रमापति
रामाय मंगलम
सी मंगलम !!!
*Nk सनातन