पूर्णता ओर मिठास का पर्याय ; भाषा हिंदी सुभाष !

पूर्णता ओर मिठास का पर्याय ; भाषा हिंदी सुभाष !

● पूर्णता ओर मिठास की पहचान जो लिखा जाता वही बोला जाता हिंदी की यही शान ●
आज हिंदी दिवस यानी अपनी माँ के लिए लोगो को बताना की ये मेरी माँ है
अफ़्सोस हिंदी की ये हालात क्यो है
इस कड़ी में सरकार और सरकारें दोषी हैं
केंद्र से एक देश एक पाठ्यक्रम होता
ओर उसमें हिंदी पठन-पाठन अनिवार्य होता
तो आज एक सो पैतीस करोड़ का देश
हां 135 में मात्र 64 करोड़ ही हिंदी भाषी नहीं होता
अफ़्सोस आज भी संसद की भाषा अंग्रेजी है
अंग्रेजी से हर्ज नही है बस हिंदी के लिए अर्ज है
हां की भारत हिंदी हैं हम हिन्दुस्ताम हमारा
हां अल्लामा इकबाल का फ़क्र की ये मर्ज क्यो है ?
हिंदी फले-फुले आज भी ये स्तिथि क्यो है
पड़ोसी दुश्मन-दोस्त चीन को देखो
सिर्फ़ अपनी भाषा मे ही बात चाहे कोई भी हो
हां आमजन या हुक्मरान दुभाषिया ही बात करता है
संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी का डंका
हां बजाया महान हिंदी वक्ता ओर राजनेता
हां कवि,केबिनेट मंत्री फिर प्रधानमंत्री
ओर देश धन्य जन्य हो गया
1953 से हिंदी दिवस का सिलसिला चला
यू कहे कि राजभाषा का पुख्ता सूत्रपात हुवा
लेकिन ये दिवस हिंदी को कम आंकने का संकेत
हां चाहे कुछ भी कहे कड़वा संकेत देता है
क्या की ..हिंदी का कम रुतबा है
ओर इसे तरज़ीह देने का अल्प कुनबा है
इसे बढ़ावा दो, हिंदी बोलो बस अफ़्सोस टपकता है
हिंदी की बिसात की क्या बात करे
बड़े बड़े राजनेता देश के कर्णधार भी
अफ़्सोस ठीक से हिंदी नहीं बोल पाते
महामहिम प्रणव दा, ममता दी ,थुरूर,सोनिया खड़के के यही हाल
फिर एक आमजन से रखे ये आस स्तिथि मजाल है
अतएव हिंदी दिवस तुरन्त हटना चाहिए
ओर हर देश के राज्य में क्षेत्रीय भाषा कोई भी पढ़े
हिंदी बस हिंदी अनिवार्य हो
उसमें फेल तो वो जमात ही पास न हो
साक्षातकार भी हो तीन भाषाओं में
एक खुद की बोली,दूसरी मात्र भाषा तीसरा द्वितीय अंतरराष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी
वो भी सरे आम सार्वजनिक उपस्थिति में
ओर किसी भी राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए हिंदी सम्प्रेषण धाराप्रवाह हो
नही तो आप कोई चुनाव ,मनोनयन के लायक नहीं
आगरा की सांसद ,पूर्व राज्यसभा सदस्य
मशहूर फिल्म अभिनेत्रि ओर नृत्यांगना हेमा जी
हां हेमाजी जिन्होंने 300 फिल्में हिंदी में की
लेकिन अफसोस 70 कि होने के बावजूद भी हिंदी पर पकड़ नहीं
इस मामले में रेखा जी मशहूर समान अदाकारा को सलाम है
की आप जब बोलती है व्यक्तिशः
तो लगता ही नही की आप हेमाजी की तरह दक्षिण की हैं !
हिंदी जयतु पसरे सर्वत्र समृद्ध भवन्तु!
*NK सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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