★नैतिकता- अनैतिकता★
नैतिकता ओर अनैतिकता क्या है ? मनुष्य ने अपने पैमाने इसे रखा है और असल मायनो में ये सर्वथा सत्य से परे है। कैसे.… ?
हाँ शादी के बाद बीबी के संग सुहागरात जायज है क्योंकि मनुष्य समाज ने इसे अपने विधान अनुसार ढाला है लेकिन उसी जगह यदि कोई महिला-पुरुष अपने प्रेमी -प्रेमिका के साथ है तो अवैधानिक है! वही यदि कोई प्रेमी युगल है तो भी पूर्वी संस्कृति जिसका सीधा अर्थ भारत से है नाजायज है। गंधर्व या प्रेम विवाह समाज की दृष्टि में अस्वीकृत एवम हेय है !
मैं बात कर रहा हूँ नैतिकता और अनैतिकता जिसे हमने अपनी सुविधा और अपने कायदे अनुसार आत्मसात किया है ,चुना है, निर्धारित किया है ! एक सरल उदाहरण मेरे जेहन में आ रहा है वो ये की एक शेर जब शिकार करता है वो कृत्य नैतिक है क्योकि ये ईश्वर प्रदत प्राकुतिक स्वभाव है। आदिमानव प्रारंभ में मांसाहारी था या शाकाहारी इस पर विवाद हो सकता है। हम मानव के सभ्य होने की बात करते हैं और सभ्यताओं के विकास क्रम और बौद्धिक सौपान जिसमे मानव की बुद्धि विकसित हुई और वह उत्तरोत्तर सुधरता गया यानी उसका जंगलीपन जाता रहा। ओर आज आधुनिक ही नही अत्याधुनिक है और विकास के चरम पर है और कुछ सुविधाएं तो स्वर्ग की कल्पना मानव ने की है के तुल्य या समकक्ष हैं। आदि समय मे मनुज ने जंगली जानवरों को जानवर मारकर मांस खाते देखा …उसने शाकाहारी जानवरो को घास-फूस खाते हुवे भी देखा और संभवतः नहीं निश्चित घास को चखा ओर उसे स्वाद रास नहीं आया। उसने जानवर को मार कर मांस चखा उसे स्वाद लगा क्योकि कच्चा मांस अपने आप मे मांसाहारी लोगो के लिए एक तैयार भोजन है! और जैसा कि अनुमान है कि उसने एक निरीह जानवर को पत्थर मारा जो उसे नही लगा और वो किसी पत्थर से टकराया निश्चित फेका गया पत्थर चकमक था और वो टकराया भी अपने भाई यानी चकमक से और वहां उगी शुष्क घास ने आग पकड़ी जो दावानल में बदलते हुवे जोर से दूर तक फैली जिसमे कई निर्दोष जानवर मारे गए और उन जानवरो का मांस उसने चखा तो जबरदस्त स्वाद वाला लगा फिर वो पचा भी जल्दी ओर इस तरह आग और भुना हुवा या पका हुवा मांस खाने की विधि चलन में आयी! अब जब बुद्धि का विकास हुवा तो शारिरिक रूप से कमझोर वर्ग अपनी बुद्धि बल से सशक्त हुवा विधान बना कर ,नियम बना कर ओर् जिसकी लाठी उसकी भेस का सिद्धान हवा किया। और वस्तु विनियम सिद्धांत बना की एक व्यक्ति सारी आवश्यक वस्तुओं का निर्माण नहीं कर सकता अतः वस्तु मुद्रा चलन में आई। और फिर मुद्रा शारिरिक रूप से कमझोर व्यक्ति की ताकत बनी और आज वही शक्तिशाली है जिसके पास धन है । धन से सरकार और सिस्टम झुकता है ,आदर करता है।
अब भी नैतिक और अनैतिक विषय पशोपेश में है कि आखिर सही क्या है ? आदि मानव को यदि प्रारंभ में ही खेती-बाड़ी ओर फलों का ज्ञान होता तो शायद वह मांसाहारी नही होता ओर् अज्ञानतावश वह निरामिष बना। लेकिन आज वो पूर्णतया सक्षम ओर ज्ञानी है और जिंदा रहने के सारे तरीके वह जानता है तो ऐसे में निरीह जानवरों को मार कर खाना क्या नैतिक है ,वाजिब है, उन मासूम ओर खूबसूरत प्राणियों को।मारने का हक आपको किसने दिया ? यदि ये नीरह जानवर सक्षम होते तो क्या वो आपको मारने देते नही कदापी नहीं। तो स्पष्ट है ये अनैतिक है क्योकि हमारी सभ्यता ,बुद्धि के हिसाब से ये वाजिब नही। आपका कोई जानवर भक्षण करे क्या आप इससे सहमत होंगें? नहीं कदापि नहीं क्योकि जब भी शेर आदमखोर बन जाता है आप उसे मार डालते हैं। यहां तक कि एक सूक्ष्म मच्छर की काट या बाईट को भी आप बर्दास्त नही करते और उसे तुरंत मार देते हैं। अब आप सभ्य है नाना प्रकार के एक से बढ़कर भोज्य पदार्थ आज उपलब्ध हैं तो निरीह प्राणियों पर दया की जा सकती है। उन्हें प्राकुतिक मौत मरने के लिए छोड़ दे। अब कुछ लोग मांसाहार के लिए ये तर्क देते हैं कि मुर्गा,बकरा,भेड़, ऊंट,भेस गाय ,सूअर ,मछली का उपयोग क्या है ? स्पष्ट है ये मनुष्य के खाने के लिए ही बनाये हैं । इसमे गाय,भेस एक उम्र के बाद उपयोगी नहीं रहते तो फालतू बोझ सो उनका भी काट जरूरी है ऐसा दैविक ओर दिव्य तर्क वो देते हैं। जाम्बिया के ओसाका चिड़ियाघर में एक पिंजरा है जिसमे एक बहुत बड़ा दर्पण ओर पिंजरे के बाहर बोर्ड टंगा है कि दर्पण में आप दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर देख सकते हैं ! और इस कड़ी में ओर् जोड़ दू की इस दर्पण में आप दुनिया का सबसे क्रूर प्राणी देख सकते हैं ! विवशताओं समझी जा सकती है लेकिन शौक समझ से परे है !
nk सनातन