व्यावसायिक दौर का कटु सत्य!

व्यावसायिक दौर का कटु सत्य!

शिक्षक न दीपक होता न जलता है
वह सिर्फ शिक्षक होता है
ओर उसे कोर्स जल्दी पूरा कराने का ही जुनून होता है
छात्र सीखे पढ़े न पढे, सुने ,गृह कार्य करे न करे
उसे कोई मतलब नहीं होता है
जैसे तैसे कोर्स पूरा हो जाय बस यही टेंशन होता है
बस कुछ बच्चे ट्यूशन आ जाये जुगाड़ होता है
ओर वो एक्स्ट्रा राशि होठो की लाली बन जाये
खुमार होता है
ओर सबसे ज्यादा महीना जल्दी पूरा हो
वेतन खाते चढ़ने का प्यार होता है !

*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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