~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

अब वक़्त है कम

यूँ तो ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं,
मगर उम्र के जिस पड़ाव पर हैं भाई,
कह सकते है गुज़री है अब तक जितनी,
मान लो नहीं है ज्यादा मेरे भाई,
इस पड़ाव पर शुरुआत हो नहीं सकती,
हां समझौता ही सम्भव और है सही।

उम्र का ये दौर आशंकित आतंकित है।
कब किस वक़्त जाने सांसे रह जाय थमी।
अब तलक दौरे मिलना जुड़ना था,
अपने से अपनों में बसना था,
अब दौर-ए-बिछड़ना है।

अपनों के जनाज़े देखना,
पाक सफर में कांधे देना,
घड़ी दो घड़ी ग़म ज़दा,
अफ़सोस अदा करना ही रस्में करनी है अदा।

कुल मिलाकर अब,
समय गिनती का है,
खुद विदा होने से पहले
अपनों को शुभचिंतकों को
बिछड़ते देखना है।
जितना जियो ज्यादा टूटते रहना है।

— नरेश कुमार ^सनातन*