ऐंठ ऐसी भी क्या !

ऐंठ ऐ भटकन का एक नमूना : एक जोक….!
वो जांबाज़ था ऊपर से धुरंधर तलवारबाज़ भी था
तलवार हरदम साथ रखता था
ओर बात- बात पे तलवार निकाल लेता था
उसे अपनी औकात पर बड़ा गुरुर था
उसे अपनी मुछ यानी न झुकने का दम्भ था
एक दिन रास्ते मे उसे काँटा चुभा
वो कराहा क्यो क्यो की जाबाज होने से पहले वह एक आदमी ही तो था
देख उसकी कराहट सामने एक झोपडी वाले आदमी ने कहा-
सुई लाऊ क्या भाईसाब
उस दम्भी ने इसे स्वाभिमान पर चोट समझा
यानी भाईसाब के स्वाभिमान का सवाल था
तुरन्त तलवार निकाली-2 और काट डाला
किसको …..?
खुद के पैर को…😂😂
**NK सेवक ” सनातन”