~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

”देश-भक्ति तोलना चाहता हूँ!!”

” देशभक्ति तोलना चाहता हूँ !”
(आज गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मेरे देश के सम्मानीय नागरिको। को। समर्पित ढेरो बधाइयो के साथ)
देश के आप हम सभी वासी हैं
हम सब देश भक्त हैं -दम भरते हैं
ये कर दूंगा -वो कर दूंगा
ये होना चाहिए -वो होना चाहिए
कहते हैं -ताल ठोक कर
आप कितने देश भक्त हैं
मै इस वेदी पर तोलना चाहता हूँ
मै हूँ कितना मै जानता हूँ
दिखावटी और छद्म नहो मेरी देशभक्ति
मेने राष्ट्र भक्ति पर कइयो को तोला है
आप कह दे मै हूँ पर इतना नही जितना तुम जताते हो
कोरी थोथी आभा बिखराते हो
इसलिए बस -2 मै तुम्हे अपनी तर्ज़ पर आजमाता चाहता हूँ

नापाक पाकिस्तान जो हमारा पडोसी कहा
सीमा मिलने से कोई पडोसी नही हो जाता
पडोस अच्छा -बुरा मिलना नसीब की बात है
पाक इस हिसाब से कलंक है पड़ोस के नाम
पाक नापाक है वहशी दुश्मन है
उस पाकिस्तान की बात पर
ज्वार बड़े उठते हैं देश भक्ति के
खून सभी के खोलते हैं जो हैं जमी के
ऐसे उबालो में कई देशवासी दम ठोकते हैं
मेरा उन्हें आह्वान है दिली पुकार है
हां जो हैं देश भक्त हैं सच्चे अच्छे
तो आओ हम भी बन्दुक नही
AK-47 उठाए – AK 47 उठाए
isi की तर्ज पर हम भी आत्मघाती दस्ता बनाये
दुश्मन को दुश्मन की भाषा में ही सबक सिखाये
क्यों हम अपने कीमती देश के रखवाले सिपाही गवाए

लेकिन इस आईने में तोला जब “सनातन नरेश “ने
इस पंक्ति में सबसे आगे मै खडा था
पीछे मुड कर देखा कोई नही था
फिर आजमाया मैने कहा
मुझे जान प्यारी नही निज देश प्यारा है
और मै पीछे घुमा देखा लोग मेरे पीछे गए हैं
आशा बलवती हुई लेकिन अफ़सोस
फिर घुमा था जेसा लेकिन
लेकिन हाय मेरे पीछे कोई नही था
सब थे नदारद देश भक्ति की इस धुन पर

धन्य हो गया मै अपने देश जनों की भक्ति पर
सोचने लगा क्या मेरा देश वही है
जो रंग बसंती बन हंसते हंसते जान से खेला
हाय इस परख से दुःख वीरो का उभरा
अशफाक बिस्मिल उधम आजाद
खुदीराम सावरकर राजगुरु तिलक
सुखदेव सुभाष मंगलपांडे
रो रहा है की मेरे देश्जनो को क्या हो गया है
और सोच रहा है की किसके लिए
हां किसके लिए उन्होंने किया जान कुर्बा है ।।
NK सनातन

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