“”तरुवर इक वरदान”
मै पेड़ तरुवर हु छायादार
लहराता मदमाता बारम्बार
मेरे तने तले बेठा प्रेमी युगल
खोया इक दूजे में लिए मन की बात
मेरी छायादार घनेरी शाखाओं में
बेठे हैं पंछी युगल लिए प्रेमालाप
कोई रीती नही इनके आड़े
ये स्वछन्द युगल नही लिए वादे
बस करते इरादे पुरे बेझिझक
बे हिचक जब चाहे सरे आम
कोई नियम नही इनके आड़े
बस कुदरत के प्राकुतिक माद्दे
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nk सनातन