महान लोकतंत्र हमेशा सवालों में रहेगा !

” महान लोकतंत्र हमेशा सवालो में रहेगा…!”
महान बर्नार्ड शा ने कहा – प्रजातंत्र मूर्खो का शासन है…..
बिल्कुल सही आकंलन …. कारण ….इसमे किसी संवैधानिक पद के लिए आपको किसी शेक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं….. बस आपकी उम्र कम से कम 25 हो ….ओर आपके पास बहुमत हो कितने मूर्खो का , कितने बुद्धिजनो का कोई मायने नहीं रखता
- एक व्यक्ति आईएएस की तैयारी कर रहा था दो बार परीक्षा में सफल लेकिन साक्षात्कार जहा पारदर्शिता नहीं हैं और पैमाने के कई कारक- अकारक होते हैं प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष…. सो बेचारा IAS नही बन सका…
उसने एक जिला स्तर पर एक राजनीतिक पार्टी बनाई और चुनाव लड़ा… चूंकि सीट आरक्षित थी एक जाति विशेष का बाहुल्य था ओर वो उसी जाति का था उसने वर्ग सिद्धान्त का लाभ उठाया …अंधो में काना राजा बनना ही था …बन गया MLA यानी विधायक… अब आलम ये है कि कलेक्टर्स , कमिश्नर्स ओर DIGs उसे सलूट करते हैं… बन्दा ठाठ ओर रुतबे से जी रहा है…
सोचता है और ईश्वर को धन्यवाद देता है कि हे ईश्वर तू बड़ा महान है… तू जो भी करता है ….. अच्छा करता है….. तूने तो मुझे कलेक्टर नहीं MLS / MP बनाना था….
*सिर्फ पार्टी और संगठन के बूते आज कई चववन्ने , अठन्ने ….
रुपिया कलदार बन गए वो भी सोने का……पार्टी ….आरक्षण….
जातिगत वोट राजनीतिक सोच आपको देश का राष्ट्रपति भी बना सकता है दलगत राजनीति और दलीय अवधारणा आपको प्रधानमंत्री भी बना सकती है… लेकिन इसमें भाग्य बड़ी चीज है दोस्तो …महान आडवाणी PM नही बन सके न ही प्रेसिडेंट
*nk सनातन