मेरे अपने जन्मदिन के मौके !

मेरे अपने जन्मदिवस के मौके
जब तक है जिंदगी जन्मदिवस आते ही रहेंगे
ओर वर्ष दर वर्ष इसे संग अपने मनाते रहेंगे
घटने के नाम बढ़ने के जश्न मनाते रहेंगे
हिंदू परम्परा अपनी चराग जलाते रहेंगे
लेकिन फलसफा ऐ मकदूनिया या पश्चिम
गिनती के सफर में खत्म एक साल सो चराग बुझाना
जीवन की पहली चीख जो अपनो की खुशी बनती है
ओर उसी चीख से जीवन भर रोने की शुरुआत होती है
बीच-बीच मे खुशियों की सौगात भी मिलती है
लेकिन अफ़सोस खुशियां ज्यादा कहां टिकती है
यदि आंकलन करे खुशी और गम का तो अनुपात 30-70 ठहरती हैं
तुम्हारा जन्मदिन सपनों की सौगात लेकर आया कभी
ओर याद वो करते जिसने भुलाया सो हर दम तुम्ही छवि
बस समर्पण मोहब्बत की असल रही है सूरत
तो तुम मन की राधा मूरत मोहन हम रास रचाये
हो तुम जिस जहाँ में शाद रहो आबाद यही पुकारे
ईबादत बन शिवाला मेरे गौरी गौरी रम जाए
तुम्हारी सांसें बनी थी हमराह हमनशीं बांसुरी बजाए
रूबरू न सही जमाने की हैं विवशताएं
तुम्हे उस खुदाई आवाज़ से जन्मदिन की ढेरों मुबारकें
*nk सेवक ” सनातन “