” मै सबला हूँ अब “
**” मै सबला हु अब “**
तू खुद को बदल -२ तभी जमाना बदलेगा
जमाने की तर्ज पर मै नारी
मेने भी खुद को बदला है
अब अबला नही मै समाज में
मै नारी उभरी बन सबला हूँ
शिक्षा को हथियार मेने भी बनाया है
*कानून में समानता के नारे को गहराया है
*खुद को बदला ज़माने की तर्ज पर
बड़े ओहदों पर खुद को बैठाया काबिल हो कर
*पहले सर गृहणी बन मातृत्व सजाती थी
*अब कई रंग रूपों में मेने अपना वजूद रुतबा जमाया है
*मैने मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति बन जनसमाज को चोकाया है
मेने सर सम्राज्ञी सयुंक्त राष्ट्र अध्यक्षा भारत कोकिला बन इतिहास सजाया है
*मेने छबीली रज़िया चाँद बीबी के इतिहास को फिर दोहराया है
*अब देशजनो हमने सीमाओं पर भी मोर्चा सम्भाला है
मेने रॉकेट उड़ा अन्तरिक्ष खंगाला है
मेने गृहस्थ इक तरफ तो इक तरफ कामकाजी होकर घर संसार सजाया है
सरकारे मेरे पक्ष में मुखर हुई है
हम आओ सशक्त बनाए
बेचारी अब नही आरक्षण की भी अब जरुरत नही
नारी शिक्षा लोकतंत्र समानता सविंधान की शान है
आओ ओ मेरी समाज बन अजूबा
देश में ही नही विश्व में भी परचम लहरायेंगे
यत्र नार्यस्तु वसते रमन्ति तत्र देवता
धरती को वीर भरत तो विदुषी गार्गी आदर्श गृहिणी मैत्रेयी और वीरांगना मर्दानी लक्ष्मी बाई बन भारत सुदृढ़ महानं बनायेंगे
nk सनातन