वजूद को तरसती …कहता हिन्दी दिवस!

हिन्दी दिवस
( हिन्दी दिवस मनाना हिंदी की गरिमा को कम करता है मेरे दृष्टिकोण में जैसे मातृदिवस मनांना…..हिंदी दिवस मना कर हम एहसास कराते हैं देश मे की हिंदी अभी भी स्थापित नही हुई है सम्पूर्ण देश मे…. जब तक हम क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा के माध्यम से नहीँ पाबद्ध करते हैं हिंदी अपना असल मुकाम नही हॉसिल कर पायेगी…..देश के पूर्व राष्ट्रपति ,गृह ,वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी जैसे विद्वान हिंदी नहीं जानते थे…. मनमोहन सिंह जी की भी हिंदी औसत दर्ज़े… महान मोदीजी की हिंदी में गुजराती टोन ओर शब्द…तो हिंदी दिवस मनाने की जरूरत दिखाती है…कमल हसन ,श्री कांत जैसी विभूतियां शुद्ध हिंदी नही बोल पाते …ये देश की विडंबना है )
मैं हिंदी साहित्य रत्न नही
मैं हिंदी साहित्य गौरव नही
मैं हिंदी साहित्य सम्राट भी नही
मैं हिंदी भूषण भी नही
यानी मैं किसी हिंदी अलंकरण से सम्मानित नही
मैं सिर्फ़ हिन्दी भाषी हूँ ओर यही मुझे झंकृत मुदित करता हैं