~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

वेलेंटाइन डे : बस यूं ही ज्वार ऐ खयाल !

♂◆ बस यूं ही…….

★♀वेलेंटाइन महोत्सव पर “सनातन” के अधजले -उखड़े खयाल ♀★
वो कहता है…..
वेलेंटाइन डे है….
ख़याल ऐ इश्क लिखूं
किसके लिए….?
इसके लिए या उसके लिये….
जिंनसे इश्क हुवा लिख चुका
अब लिख नहीं सकता ….
लिखू तो मुश्किल होगी. …
क्यो…..
जाहिर है दाम्पत्य असंतुलित हो सकता है
इधर से उधर से
इस इजहार से क्या हो जाएगा
वैसे भी मोहब्बत प्रेमिल जोड़ो की
सार्वजनिक नहीं निजता का परम है
पाश्चात्य कल्ट में इज़हार सार्वजनिक है
अमेरिका ,इंग्लैंड के राष्ट्रप्रमुख सरे आम
इजहार करते हैं
ओर उनकी जनता उन्हें सर आंखों पर लेती है
उनकी संस्कृति में ब्रॉडनेस के नाम ये परम्परा आम हैं
फिर आर्यावर्त्त में ऐसे नाजुक मौके पर इजहार ठीक नही
रोशनी आती रहे दूर से ही सही
सामने हो चमन कोई कम तो नही
लेकिन इस कड़ी में बेवफाई एक प्रकुति है
जो पुरुष-स्त्री दोनो समान रूप से नापसंद करते है
न नर ना मादा बेवफाई पसन्द करती है
लेकिन पुरुष इसे ज्यादा भारी रूप से लेता है
वो खुद पर गमन करने को वेध मानता है
खुद की स्त्री का नही
क्योकि इसे वरजीनिटी या कौमार्य या सतित्व पतित्व से जोडता है
लेकिन भारतीय तो क्या वैश्विक रूप से भी पुरुष ज्यादा स्वतंत्रत है
इसीलिए वर्जिन मेरी हुई वर्जिन जोसेफ़ का कोई कांसेप्ट नही
विवाहेत्तर कायीक संबंध स्वीकार्य नही
लेकिन पूर्व का अफ़ेयर विदित हो तो
आग लग जाती है
पुरुष हो या स्त्री दोनो में
शरारत का ये गाना — मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बात….
इतना महान 100000 में कोई एक हो सकता है
हो सकती है
फिर संगम का गीत
तन सोप दिया मन सौप दिया…..
ये धरती है इंसानों की
कुछ ओर नही इन्सान है हम….
किताबी बाते है…
हकीकत का आईना बहुत विषम है..
अतः घर बिगड़े दोनो के खतरा…
अतः वैवाहिक जोड़ा ये सिर्फ़ वर्तमान में
यानी एक दूजे को इज़हार ऐ मोहब्बत
चाहे हो न हो
दाम्पत्य के नाम और
इससे ज्यादा जीवित रखने प्राकट्य कर सकते हैं…..
अब जो वही है स्वर्ग है
जीना यहां मरना यहां उसके सिवा जाना कहा…
लेकिन
जिससे हुवा नही इश्क जीवनसाथी के नाम…
लिखू इश्क या वेलेंटाइन
कैसे उसके लिए लिखना जाहिर है जायज नही
ओर लिखा तो यक़ी नही होगा ..
लेकिन चलो उस पवित्र बंधन के नाम
जिसे समाज ने मान्यता दी
कानून ने मान्यता दी
ओर स्थाई सुख सब तरह का …
के लिये लिख लो..
नही तो नाइंसाफी होंगी …
जमीर कोसेगा….
जहां तक दाम्पत्य की बात है. . .
इश्क कहां होता है….।
समाज के नाम एक गठजोड एक समझौता…
पूरब में गंधर्व विवाह
यानी प्रेम-विवाह कहां होता है….
वैसे वेदों-पुराणों-उपनिषदों;अरण्यों में इसका जिक्र है…..लेकिन ये
अवार्चिन बात है …
स्वयंवर पसन्द की शादी का असल नाम है
अधतन युग मे प्रेमविवाह के कुछ अपवाद जरूर है
जिनमे सफलता-असफलता की अलग -अलग दास्ता हैं
खूबसूरत अफसानों के फसाने है…
बहारे हैं तो खिजा के आलम भी…..
जो टिके …. न टिके तो अलगाव…
दाम्पत्य वेध अनुबंध है
संतान जायज कहलाती है
मालिकाना हक की वारिस कहलाती है

ओर धार्मिक-वैधानिक-
सामाजिक बंध से शारीरिक जरूरतों का
अभय सुख होता है….
छुपा दुख भी हो सकता है
लेकिन उन सुखों के मानिंद नगण्य …
आप विशेष कर मर्द निठल्ला नही बैठ सकता
कमाना पुरुष की जिम्मेदारी है
भारतीय समाज मे

लेकिन पाश्चात्त्य की तर्ज पर महिलाएं नोकरी कर रही है
लेकिन उसमें 90 % शौकिया
लेकिन पुरूष कोई ऐसा नही
हर पुरुष मजबूरन ही नोकरी काम करता है
हां महिलाएं कोई भी मजबूरी से ही मजदूरी करती हैं
जाहिर है शौकिया नहीं…..
यानी दांपत्य सिर्फ एक सामाजिक समझौता होता है
ओर कुछ नही बस… ज्यो-त्यों निभाना होता है
हंस के निभाये तो बेहतर
नही तो रो-रो के भी गुजर जाती है
भारतीय दंपति बच्चों के लिए ही अपनी जिंदगी
एक छत के नीचे गुजार देते हैं….
क्योकी दूसरे रिश्ते की भी कोई गारंटी नही है कि अच्छा हो……
पाश्चात्य संस्कृति की बात है जहां तक
वहाँ अरेंज मेरिजे नही के बराबर….
वहां पहले आकर्षक फिर घर्षण….
मगर पहले प्रेम होता है
प्रेमिल जोड़े उड़ान भरते हैं….
बच्चे भी हो जाते हैं लिव इन रिलेशन में…
भारत मे ये कमाल
सिर्फ और सिर्फ़
नीना गुप्ता ( चोली के पीछे क्या है ….गाने पर थिरकने वाली एक्ट्रेस )
महान क्रिकेटर विव रिचर्ड्स की प्रेमिका
जो बिना ब्याहे बेटी मसाबा को पैदा करने की हिम्मत करती है
लेकिन वो सलेब्रिटी हैं
एक आम महिला ये हिम्मत नही कर सकती
ओर कर दी तो ये बेरहम
समाज का ठेकेदार खाप उसे जीने नही देगा
यहां तक कि एक आम भी उसे कोसेगा…
यानी भारत मे ये प्रथा चलन में नही
हां फिर प्रेमिल जोड़ा
औपचारिक रूप से शादी करता है
फिर कुछ समय बाद
भेद -विभेद ओर अलगाव
यानी तलाक होते हैं पाश्चात्य संसार मे ..
मर्द एलुमनी चुकाता हैं
ओर महानता देखो
बिल बाई डेन कमला हैरिस की पुर्व पत्निया-पति बच्चे सब आते हैं शपथ रस्म में ….
राष्ट्रपति सरेआम पत्नी को चूमते है
हिंदुस्तान में ये अपराध है पाप है…..
राजीव जैसे ऑक्सफोर्ड स्कॉलर सोनिया को सरेआम चूमते नही दिखे भारत मे
जाहिर है ये कृत्य इंग्लैंड में अंजाम पाया होगा….
यहां तक कि भारतीय प्रधानमंत्री अपनी पत्नि का हाथ भी पकडने में झिझकता है…
लेडी माउंटबेटन लालजवाहर की वेलेंटाइन थी
लेकिन अंतरंगता सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं कि……
यानी पाश्चात्य कल्ट में
प्रेम जहां आम है
अलगाव भी खास है
अतः इजहार कर लिया जाय
लाल पिला सफेद पुष्प का रिवाज हिंदुस्तान में नही
यहां वैसे मौसम 6 आते हैं लेकिन प्रेम सदाबहार है दांपत्य का…
जिसे निभाना ही है
अतः वहां होता है प्रेम
सो इजहार ऐ मोहब्बत
वेलेंटाइन डे मनाया जाता है
संत वेलेंटाइन प्रेम करते हैं….
तब का जड़वत पारम्परिक यूरोपीयन समाज उन्हें जला देता है
प्रेमिका सहित
यानी सन्त की प्रेम का अधिकार नही
ओर प्रेम वहां भी अपराध
रोमियो जूलियट वहां भी सताए गए हैं….
भारत मे कई संतो ने प्रेम किया…..
आशाराम ,रामरर्हिम सन्त कथावाचक
इच्छा के विरुद्ध सब कुछ अनर्गल
सो कानून जे शिकंजे में ..
ग़नीमत है उन्हे
जलाया नही गया
उनका प्रेम वासनात्मक था
वेलेंटाइन का सच्चा
गृहस्थ जिया
याज्ञवल्क्य मैत्रेयी-कात्यायनी दो भार्या
अपच लेकिन सत्य
कृष्ण-राधे प्रेम अधूरा
पर पूर्ण से भी ऊपर
जो पवित्रम पावन जो पूजा जाता है
यानी भारत प्रेम में महान
लेकिन
हीर-रांझा ,ढोला-मारू,
सोनि;महिवाल प्यार के जुर्म में सजा पाते हैं
भारत मे एक तबका ऐसे प्रेम महोत्सव इजहार दिवस का विरोधी
तो भारत की संस्कृति में इतने त्यौहार
बहन के लिए रक्षा बंधन
भाई के लिए भाई दूज
लेकिन प्रेम ऐकम नही
लेकिन है
बहुत बड़ा —
महाशिवरात्रि
प्रेम की पराकाष्ठा वाला दिन
जो प्रेम तपस्या में तपा हुआ
दाम्पत्य में बंध इतिहास रचाता है
तो चलो जिन्हें ऐतराज है
बफर डिनर पर
बाजीराव पेशवा स्टाइल कह बफर उड़ाते हैं
तो चलो
महाशिवरात्रि को भारतीय प्रेमदिवस वैधानिक रूप से घोषित कर
प्रेमपान किया जाय
आध्यात्म रस में प्रेम विभोर हो
खजुराहो जीवित किया जाय
प्रेम-काम पर नाज़ करने वाले ऐ मग़रिब या पश्चिम
याद रख महान वात्सायन हिंदुस्तान में हुवे हैं
संस्कृति जिसकी विशाल
पांचाली हुई है जिनके
पाँच कायासहभागी हुवे हैं
सतीत्व -पतित्व को धत्ता बताता उदाहरण ज्वलंत
यानी पुरुषों के विशेषकर
रसूखों-धनिकों, संभ्रांतों राजा- महाराजाओं के 20-30 रानियां
महान चक्रवर्ती महाराज दशरथ के तीन
महान महाराणा प्रताप के मात्र 18 अर्धांगिनी…
यानी एक से अधिक पति के उदाहरण में
द्रोपदी मात्र इक…….
यहां देहाती मेलो में
जन-जाति विशाल ह्र्दया
जीवन-साथी पसन्द पर हाथोहाथ चुनते हैं।
ओर सिर्फ एक से ही बंध के रहने का रिवाज नही
जब तक निभी ठीक
नहितर खाप बुलाओ
जुर्माना भरो
ओर राहै अलग
दोनो स्वतंत्र
बच्चे हैं पुरुष ले जिम्मा
ओर सब कुछ फिर सहज नही पर सहज
अस्त हो पस्त किसी को नही मतलब !!!!!
नॉट- दोस्तो मैने एक नव्य शैली का नाम दिया है इस प्रकार की लेखन शैली को जिसे मैंने messagaa मेसेजा नाम दिया है….
अंग्रेजी भाषा मे मैंने ऐसे कुछ आइटम लिखे हैं जिसे messagaa नाम दिया है लगभग 4 साल पहले। ये उसी शैली का एक उद्धरण हैं।
♀ NK सनातन

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